दृष्टिकोण बदलने की प्रेरणा देता है पर्व : लक्ष्मी

कोरबा। अतीत में शक्ति का वरदान पाकर दानव और असुरों का संहार करने की घटनाएं हुई है और इनमें प्रमुख भूमिका देवी देवताओं ने निभाई। आज भी देवीय शक्तियों की उपासना के पीछे यही सिद्धांत काम कर रहा है। बृहद तौर पर देखा जाए तो पर्व त्यौहार के पीछे शुद्धता सुचिता के साथ-साथ सृजन को आकर देने वाली नारी शक्ति के सम्मान की भावना कई ज्यादा है।
विद्यार्थियों और समाज को अपनी रचनात्मकता से इन्नोवेटिव आईडियाज देने का काम कर रही शिक्षिका लक्ष्मी तिवारी ने विशेष चर्चा में यह बात कही। उनका मानना है कि नवरात्र पर श्रद्धा भक्ति और आस्था के साथ स्त्री शक्ति के प्रति समाज का दृष्टिकोण विस्तृत रूप से बदलने का भी एक माध्यम है। विभिन्न क्षेत्रों में हो रही घटनाओं का उन्मूलन करने के लिए सिस्टम के द्वारा बनाए गए नियम कानून और फार्मूले काम कर रहे हैं। जरूरत इस बात की भी है कि जिस तरह की सोच के कारण जो तबका इस प्रकार के अपराधों को अंजाम देता है, उसके बौद्धिक विकार को दूर किया जाए। अलग-अलग स्तर पर अपनी कल्पनाशीलता से सम्मान प्राप्त कर चुकी श्रीमती तिवारी का कहना है कि सकारात्मक से हम परिस्थितियों को अनुकूल कर सकते हैं। इसलिए सबसे बड़ी बात यह भी है कि नकारात्मक चीजों को हटाने के लिए शून्य से काम करना होगा। नवरात्र पर्व को लेकर उन्होंने यह भी कहा कि केवल 9 दिन तक लोगों के मन में पवित्रता की भावना आदि आबादी के बारे में नहीं होना चाहिए बल्कि यह तो सर्वकालिक आवश्यकता है।

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