
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि भारत का अंतरिक्ष सफर किसी देश से होड़ करने के लिए नहीं, बल्कि आम जनमानस के कल्याण के लिए शुरू हुआ था। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग है।
बेंगलुरु में आयोजित ‘यूएस-इंडिया स्पेस बिजनेस फोरम’ के उद्घाटन समारोह में उन्होंने भारत के छह दशक लंबे अंतरिक्ष सफर की उपलब्धियों और भविष्य के लक्ष्यों को साझा किया। उन्होंने दोहराया कि अंतरिक्ष पूरी वैश्विक बिरादरी के लिए साझा स्थान है और इसका लाभ दुनिया के हर नागरिक को मिलना चाहिए। इसरो प्रमुख ने ऐतिहासिक तथ्यों को याद करते हुए बताया कि भारत का पहला राकेट 1963 में अमेरिका द्वारा निर्मित था और उसे नासा ने ही उपलब्ध कराया था। नारायणन ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत किसी से प्रतिस्पर्धा करने के लिए नहीं, बल्कि आम आदमी के लाभ के लिए उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी लाने के उद्देश्य से की गई थी। आज यह केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक समुदाय की सेवा कर रहा है।
फोरम में मौजूद 14 अमेरिकी व्यापारिक भागीदारों और प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए इसरो प्रमुख ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध अब केवल सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह ‘समान स्तर की साझेदारी’ में बदल चुके हैं। उन्होंने चंद्रयान मिशनों और निसार उपग्रह का उदाहरण देते हुए इसे केवल तकनीकी नहीं, बल्कि एक ‘भावनात्मक सहयोग’ करार दिया।


































