
CG News: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी कलह एक बार फिर से चर्चा में है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता रविंद्र चौबे के बयान ने पार्टी के भीतर एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। चौबे ने भूपेश बघेल के जन्मदिन पर कहा था कि प्रदेश की जनता चाहती है कि कांग्रेस की कमान भूपेश बघेल संभालें और उनके नेतृत्व में 2028 में फिर से कांग्रेस की सरकार बन सकती है।
पीसीसी चीफ की शिकायत और अनुशासन समिति की बैठक
इस बयान को संगठन ने गंभीरता से लिया है और पीसीसी चीफ दीपक बैज ने इस मामले की शिकायत हाईकमान से कर दी है। जल्द ही कांग्रेस अनुशासन समिति की बैठक होने वाली है, जिसमें चौबे के बयान पर भी चर्चा होगी।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट से शिकायत की है कि संगठन को अस्थिर करने का प्रयास वरिष्ठ नेता द्वारा किया जा रहा है। हालांकि अधिकृत तौर पर कोई नेता खुलकर नहीं बोल रहा है। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि रविंद्र चौबे महाज्ञानी नेता हैं और उनके बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
संगठन के भीतर असंतोष
चौबे के बयान को कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। मौजूदा समय में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज हैं, लेकिन चौबे का बघेल के नेतृत्व पर जोर देना संगठन के भीतर असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
टीएस सिंहदेव ने दिया बयान
पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की स्थिति पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस मजबूत है और किसको क्या जिम्मेदारी देनी है इसका फैसला हाई कमान ही तय करेगा। सिंहदेव ने कहा कि जब उनका जन्मदिन आयेगा तो कोई और कुछ बोल देगा, इससे कुछ होना जाना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाई कमान का फैसला ही सर्वमान्य होगा। रविंद्र चौबे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंहदेव ने कहा कि चौबे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के काफी करीबी हैं और भावना में आकर उन्होंने बात कह दी होगी। सिंहदेव के इस बयान से लगता है कि वे हाई कमान के फैसले का सम्मान करते हैं और पार्टी के भीतर की राजनीति को ज्यादा तवज्जो नहीं देना चाहते हैं।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव का तंज
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कलह पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में आंतरिक कलह कोई नई बात नहीं है और कांग्रेस के नेता आपस में झगड़ते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को ही भूपेश बघेल पर भरोसा नहीं है, क्योंकि उनके नेतृत्व में ही कांग्रेस की लोकसभा और विधानसभा चुनाव में हार हुई है ।