
चांपा। हनुमान मंदिर प्रांगण में चल रहे जगद्गुरू श्री कृपालु जी महाराज के प्रमुख प्रचारक स्वामी युगल शरण जी के प्रवचन के दूसरे दिन उन्होंने जीव, जगत और भगवान के अनंत रहस्यों पर प्रकाश डाला। स्वामी जी ने कहा कि विश्व का प्रत्येक जीव मूलत: आस्तिक है, क्योंकि सभी कर्मों का अंतिम प्रयोजन आनंद है। कोई भी जीव बिना प्रयोजन कार्य नहीं करता। दर्शनशास्त्र कहता है- प्रयोजनमनुद्दिश्य मंदोऽपि न प्रवर्तते। उन्होंने बताया कि मानव के सभी कर्म, चाहे शारीरिक हों या मानसिक, आनंद प्राप्ति के लिए होते हैं। हम कहते तो हैं कि मैं आत्मा हूं, लेकिन अनुभव न होने से स्वयं को शरीर मान बैठे हैं।
जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं जानता, तब वह शरीर-सुख में ही लक्ष्य खोजता है। स्वामी जी ने हँसी में कहा- जो अपने आपको नहीं जानता, वह संसार रूपी पागलखाने का पागल है, और संत भी पागल हैं, पर उनका पागलपन भगवान के लिए है। स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि भगवान ही हमारा सच्चा, नित्य और नि:स्वार्थ संबंधी है, क्योंकि माता-पिता, पति-पत्नी, भाई-बहन सभी संबंध शरीर तक सीमित और स्वार्थयुक्त हैं, जबकि भगवान अनादि-अनंत उपकारकर्ता हैं। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और स्वामी जी के गहन, वैज्ञानिक तथा आध्यात्मिक विश्लेषण सुनकर भावविभोर हो उठे।




















