
सीताराम नायक
जांजगीर चांपा। जिला अस्पताल जांजगीर में इन दिनों मरीजों को पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रही है। यहां ओपीडी में मरीज को लिखे गए दवाइयों में से अधिकतर दवाई को मरीज बाहर से खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं, जिन्हें एक दो दवाई के अलावा अन्य बाकी दवाईयां महंगे दामों में बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदना पड़ रहा है। जिससे शासन की योजनाओं का अपेक्षित लाभ मरीजो को मिलते नहीं दिख रहा है। जिसके लिए जिला प्रशासन एवं अस्पताल प्रबंधन को ध्यान देने की जरूरत है।
ज्ञात हो कि जिला अस्पताल जांजगीर में 100 बिस्तर अस्पताल है जहां दूर दराज से लोग विभिन्न बीमारियों का इलाज कराने के लिए यहां आते हैं,लेकिन इस जिला अस्पताल में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है किंतु जिम्मेदार लोगों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं देने के कारण मरीजों को इन समस्याओं से रोज जूझना पड़ रहा है। पहले तो जिला अस्पताल जांजगीर के ओपीडी में पर्ची कटाना एक टेढ़ी खीर है। जहां घंटों लाइन लगने के बाद लोगों को ओपीडी का पर्ची मिल पाता है । वहीं पर्ची मिलने के बाद डाक्टरों के पास लाइन लगाना एक किसी संघर्ष से कम नहीं है। जैसे तैसे डॉक्टर जांच कराने एवं दवाई लिखाते इतनी देर हो जाती है कि दवा वितरण केंद्र बंद हो जाता है। जिसके लिए मरीजो को दूसरे दिन दवाई लेने के लिए आना पड़ता है।
यहां पदस्थ चिकित्सकों द्वारा मरीजों की बीमारी को ध्यान में रखते हुए जिस तरह की दवाइयां लिखी जाती है उनमें से अधिकतर दवाई जिला अस्पताल में मरीजो को नसीब नहीं हो पाता । जिसे वह बाहर के मेडिकल स्टोर से महंगे दामों पर खरीदने को मजबूर होते हैं। जबकि शासन द्वारा यहां दवाइयां खरीद कर जनता के हित में वितरण करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किया जाता है बावजूद इसके मरीजो को समय पर पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रही है। यह किसी एक चिकित्सक द्वारा लिखे गए दवाइयां का मामला नहीं है बल्कि अधिकतर चिकित्सकों द्वारा लिखे गए पर्ची का यही हल है। विगत कुछ समय से चर्म रोग विशेषज्ञ द्वारा जो दवाइयां लिखी जा रही हैं उनमें से अधिकतर मरीजों को खाली हाथ ही लौटना पड़ता हैं। चिकित्सकों को भी ऐसी दवाइयां लिखनी चाहिए जो जिला अस्पताल मे उपलब्ध हो सके।

















