
गुवाहाटी। असम की 1983 की हिंसा पर त्रिभुवन प्रसाद तिवारी आयोग की रिपोर्ट खून-खराबे के चार दशक से ज्यादा समय बाद मंगलवार को राज्य विधानसभा में वितरित की गई। इसमें नेल्ली हत्याकांड भी शामिल है, जिसमें 2,000 से अधिक लोगों की जान गई थी।.
हिंसा सांप्रदायिक नहीं थी- रिपोर्ट
रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंसा सांप्रदायिक नहीं थी, लेकिन प्रवासियों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ने का असम के लोगों का डर काल्पनिक नहीं था। आयोग ने ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) और असम गण संग्राम परिषद (एजीएसपी) को आंदोलन शुरू करने और उसके परिणामों के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया।
रिपोर्ट में कहा, तोड़फोड़ और बंद की घटनाएं सुनियोजित थीं। उन्हें बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया था जो बाद में नियंत्रण से बाहर हो गई थीं और हिंसा के कारण जान-माल का बहुत नुकसान हुआ।
1983 के पहले चार महीनों में हुई घटनाओं की जांच की थी
सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी त्रिभुवन प्रसाद तिवारी की अगुआई वाले आयोग ने 1983 के पहले चार महीनों में हुई घटनाओं की जांच की थी। इस दौरान फरवरी में हुए चुनाव में लगभग एक वर्ष के राष्ट्रपति शासन के बाद कांग्रेस सत्ता में आई थी।




















