तनाव को समझें’: बंगाल SIR मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दिया ये निर्देश

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर मचे घमासान के बीच आज आज सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि ‘तार्किक विसंगति’ की श्रेणी में नोटिस पाने वाले करीब 12 लाख मतदाताओं के नाम सार्वजनिक किए जाएं और उन्हें इससे संबंधित दस्तावेज पेश करने के लिए भरपूर समय दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि वर्तनी (मात्रा) की मामूली गलतियों या पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड्स की विसंगतियों के चलते किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से बाहर नहीं होना चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि माता-पिता और बच्चों के बीच उम्र के कम अंतर को आधार बनाकर नाम नहीं हटाए जा सकते, क्योंकि भारत में ‘बाल विवाह’ एक कड़वी वास्तविकता रही है।

दरअसल, तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ’ब्रायन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ को बताया कि लोगों को उनके दादा-दादी और नाना-नानी के बीच उम्र के अंतर के आधार पर ‘तार्किक विसंगति’ की श्रेणी में नोटिस भेजे जा रहे हैं। वे कहते हैं कि अगर गांगुली की वर्तनी अलग है, तो वे नाम हटा देते हैं। माननीय न्यायाधीश महोदय जानते हैं कि दत्ता की वर्तनी अलग है। वे नामों को हटाने के उद्देश्य से नोटिस जारी कर रहे हैं।

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