
कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड दीपिका क्षेत्र के विस्तार के लिए आसपास की जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है। हरदी बाजार में जमीन की कीमत, नौकरी की पात्रता और सर्वे सूची घोषित नहीं करने सहित 14 मुद्दों को लेकर ग्रामीण होने अनिश्चितकालीन आरक्षण शुरू किया है। उनका कहना है कि किसी भी कीमत पर प्रशासन और प्रबंधन की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कोल इंडिया ने कोरबा जिले में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों का सराउंडिंग एरिया बढ़ाने के लिए कवायद तेज की है। आसपास के क्षेत्र में कोयला का विशाल भंडार मौजूद होने और अगले कई वर्षों तक उसका दोहन करने का सर्वेक्षण पहले ही कराया जा चुका है। उसके सामने संबंधित क्षेत्र की जमीन का सर्वे करने से लेकर उसे अधिग्रहित करने की चुनौती है। इधर हरदी बाजार में ग्रामीणों ने अधिकारियों की जोर जबरदस्ती से तंग आकर अनिश्चितकालीन अनशन प्रारंभ किया है। इससे पहले ही लोग ड्रोन सर्वे पर आपत्ति जाता चुके हैं और कुछ लोगों पर तोडफ़ोड़ के इरादे से आने वाली टीम को उल्टे पैर वापस भी कर चुके हैं। पूर्व विधायक पुरुषोत्तम कंवर सहित आंधी जनप्रतिनिधियों का सहयोग इस मामले में ग्रामीणों को लगातार मिल रहा है। अनशन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने बताया कि ग्रामीणों की सबसे प्रमुख मांग यही है कि सर्वे सूची सबसे पहले घोषित करने के साथ आगे की कार्रवाई की जाए। आरोप है कि अभी तक ऐसी कोई सूची प्रशासन या प्रबंधन की ओर से जारी नहीं की गई है और ना ही यहां की मूल जमीन से लेकर परिसंपत्ति की कीमत घोषित की गई। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर भूमि अधिग्रहण के मामले में नौकरी की पात्रता कितने लोगों को होगी, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है। बसाहट का मामला भी अब तक क्लियर नहीं हो सका है। इसके अलावा औऱ भी मुद्दे हैं, जिन पर ग्रामीण ने अपना विरोध जताया है। उनका कहना है कि इससे पहले स्थानिय स्तर पर ऐसे 100 लोगों की संपत्ति का सर्वे जोर जबरदस्ती के साथ कर लिया गया जो साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में काम करते हैं।
बेहद कड़वे अनुभव रहे हैं लोगों के
ग्रामीणों ने कहां आएगी जब तक हमारे सभी मांगे पूरी नहीं होती और समस्याओं का समाधान जमीनी स्तर पर नहीं हो जाता, प्रशासन से लेकर प्रबंधन की मनमानी को बिल्कुल होने ही नहीं दिया जाएगा। कहा जा रहा है कि कोरबा जिले में गेवरा , दीपिका, कुसमुंडा और कोरबा क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के मामले से जुड़े अनेक समस्याएं लंबा समय गुजारने के बाद भी जस की तस बनी हुई है। लोगों के काफी कड़वे अनुभव इस मामले में है, इसलिए वह नहीं चाहते कि एक बार फिर से पुराने अध्याय को दोहराया जाए।


















