‘हमें चुनावी उद्देश्य से नागरिकता की जांच का अधिकार’, चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि वह मतदाता सूची एवं चुनाव के आयोजन से संबंधित मामलों में मूल प्राधिकारी के रूप में कार्य करता है और अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य देश की नागरिकता हासिल करता है, तो इस संबंध में आयोग की राय राष्ट्रपति पर बाध्यकारी होती है। लिहाजा चुनाव के उद्देश्य से उसे नागरिकता की जांच करने का अधिकार है।

चुनाव आयोग ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान यदि कोई प्रतिकूल निष्कर्ष निकलता है तो उसके परिणामस्वरूप संबंधित व्यक्ति का नाम केवल मतदाता सूची से हटाया जाएगा और वह (उस तथ्य के कारण) निर्वासन का कारण नहीं बनेगा। हालांकि ऐसे मामले को वह नागरिकता अधिनियम एवं उससे संबंधित कानूनों के तहत जांच व संभावित कार्रवाई के लिए केंद्र को भेज सकता है।

आयोग ने यह भी कहा कि खनन पट्टों या अन्य वैधानिक लाभों से जुड़े कई नियामक ढांचों में नागरिकता एक अनिवार्य शर्त होती है और सक्षम प्राधिकारी इसकी जांच कर सकता है। इस दलील के जरिये आयोग ने उस तर्क का खंडन किया कि वह अपने संवैधानिक अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर काम कर रहा है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने ये दलीलें पेश कीं। पीठ ने उन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई फिर से शुरू की, जिनमें बिहार सहित कई राज्यों में एसआइआर के आयोग के फैसले को चुनौती दी गई थी और आयोग की शक्तियों के दायरे, नागरिकता और मतदान के अधिकार पर महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाए गए थे।

RO No. 13467/10