‘हम ग्रीनलैंड की रक्षा करेंगे’: डेनमार्क ने अमेरिका को नाटो युद्ध के ‘विनाशकारी’ परिणाम की चेतावनी दी

कॉपेनहेगन/वाशिंगटन। डेनमार्क और ग्रीनलैंड पर अमेरिकी दबाव तेज होने के साथ अंतरराष्ट्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है। डेनमार्क के सांसद और रक्षा समिति के अध्यक्ष रासमुस जारलोव ने साफ कहा कि यदि अमेरिका ग्रीनलैंड पर सैन्य हमला करता है, तो डेनमार्क को अपनी रक्षा करनी होगी।

जारलोव ने चेतावनी दी

एनडीटीवी के अनुसार, जोरलोव ने कहा “हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम पर सैन्य हमला करना स्वीकार्य नहीं है, और इससे दो नाटो देशों के बीच युद्ध जैसी हास्यास्पद और विनाशकारी स्थिति उत्पन्न हो जाएगी, जो पूरी तरह से विनाशकारी, बेहद मूर्खतापूर्ण और अनावजश्यक होगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर हमले की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि पहले से ही दोनों देशों के बीच 1951 का रक्षा समझौता है, जो अमेरिका को द्वीप पर सैन्य अड्डे और खनन गतिविधियों की अनुमति देता है। जारलोव ने कहा, “ट्रंप के लिए कोई खतरा, शत्रुता या औचित्य नहीं है। हम आशा करते हैं कि बातचीत से मामला पटरी पर आएगा।”

डेनमार्क की पीएम की कड़ी चेतावनी: नाटो का अंत हो सकता है

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने और सख्त लहजे में कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी सशस्त्र हमला 76 साल पुराने नाटो गठबंधन के लिए अंत का कारण बन सकता है। उन्होंने बताया कि निश्चित रूप से सैन्य हमला नाटो का अंत होगा, क्योंकि तब डेनमार्क को नाटो के अनुच्छेद 5 का सहारा लेना पड़ेगा।

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