
सरसीवांं के दुबे परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ में सम्मिलित हुए महामण्डलेश्वर
शिवरीनारायण। महामण्डलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास महाराज सरसींवा के दुबे परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ में सम्मिलित हुए। यहां पहुंचने पर आयोजक परिवार के द्वारा बहुत ही आत्मियता पूर्वक स्वागत किया गया। राजेश्री महन्त जी महाराज ने व्यास पीठ की पूजा अर्चना की, आचार्य ने भी चरण स्पर्श कर परम पूज्य गुरुदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उपस्थित श्रोता समूह को संबोधित करते हुए राजेश्री महन्त महाराज ने कहा कि – यहां पहुंचने के लिए कई दिनों से कार्यक्रम बना हुआ था किंतु अत्यधिक व्यस्तता के कारण नहीं आ पाया। आचार्य जी कह रहे थे कि विगत वर्ष भी इस कार्यक्रम में हम नहीं पहुंच पाए थे, सेवा का कार्य बहुत ही कठिन होता है?। श्री दूधाधारी मठ, श्री शिवरीनारायण मठ, श्री राजीव लोचन मंदिर सहित अनेक स्थानों की सेवा करने का उत्तरदायित्व इस शरीर को प्राप्त है। पूरे राज्य भर से सामाजिक, आध्यात्मिक, राजनीतिक, शैक्षणिक अनेक गतिविधियों से संबंधित निमंत्रण प्राप्त होते रहता है, जितना अधिक हो सकता है हम पहुंचने की हर संभव कोशिश करते हैं। कभी-कभी कुछ कार्यक्रम में हम चाह करके भी सम्मिलित नहीं हो पाते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने श्री रामचरितमानस में लिखा है कि राम कीन्ह चाहहिं सोइ होई। करें अन्यथा अस नहीं कोई।।* अर्थात भगवान श्री रामचंद्र जी जो चाहते हैं वही होता है उनकी इच्छा के विरुद्ध इस जगत में कोई भी कुछ नहीं कर सकता ! आज उनकी कृपा हुई है, कुछ समय के लिए सही आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। व्यासपीठ पर विराजित आचार्य देवशरण दुबे जी महाराज ने कहा कि संत महात्माओं के चरण रज पड़ जाने से कार्यक्रम सफल हो जाता है। आज हमारा यज्ञ पूर्णत: सफल हुआ जिन पितरों के मोक्षार्थ यह कार्यक्रम आयोजित है उन सभी को मुक्ति मिलेगी। संत भगवान के ही स्वरूप होते हैं। भागवताचार्य पवन चतुर्वेदी जी ने इस अवसर पर कहा कि ज्ञान भक्ति श्रद्धा उनमें अनंत है, जिनका नाम राजेश्री महन्त है। भागवताचार्य शैल महाराज ने भी लोगों को संबोधित किया और कहा कि आज महापुरुष के दर्शन से हम और हमारा परिवार, नाते रिश्तेदार कृतार्थ हुए हैं। इस अवसर पर विशेष रूप से रमेश दुबे, कमल दुबे, हितेश दुबे, नितेश दुबे, दिगंबर दुबे, मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव, रामलोचन त्रिपाठी जी सहित अनेक गणमान्य नागरिक गण उपस्थित थे।























