संतुलन बनाते हैं वन्य जीव लोगों की जागरूकता से होगा संरक्षण

कोरबा। घने जंगलों, आसमान छूते पहाड़ और प्राकृतिक जल स्रोतों से परिपूर्ण कोरबा जिला अनेक दुर्लभ वन्य जीवों और वनस्पतियों का आश्रय स्थल है। पर्यावरणीय संतुलन में इनकी अहम भूमिका है। इनका संरक्षण करना नागरिकों की जिम्मेदारी है।वाइल्डलाइफ सेक्टर में काम कर रहे जितेंद्र सारथी ने बताया कि हाथी, भालू, तेंदुआ, शाह, कहट, ऊदबिलाव , कबर बज्जू , उडऩ गिलहरी , किंग कोबरा सहित विभिन्न प्रकार के सरीसृप, पक्षी एवं औषधीय पेड़-पौधे जिले में उपलब्ध हैं। इनकी उपस्थिति से कोरबा का जंगल जीवंत और चहकता रहता है। कई बार बाघ और गौर की मौजूदगी भी कटघोरा क्षेत्र के जंगलों में देखने को मिलती हैं। विभिन्न प्रजाति के पक्षियों व उल्लू कि भी अच्छी खासी संख्या हैं जो प्रकृति को संतुलन करने में अपनी एहम भूमिका निभाते हैं। जितेंद्र ने कहा कि कोरबा की यह प्राकृतिक समृद्धि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, वन्य जीवों और उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा के लिए गांव और शहर दोनों क्षेत्रों के नागरिकों को समान रूप से समर्पित होकर कार्य करना होगा,उन्होंने अपील की कि किसी भी वन्य जीव को नुकसान न पहुंचाया जाए तथा घायल या संकटग्रस्त जीव दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग या रेस्क्यू टीम को सूचना दी जाए,अवैध शिकार और पर्यावरण क्षति के विरुद्ध जनभागीदारी ही संरक्षण की सबसे बड़ी शक्ति है। वन्य जीव बचेंगे तो जंगल बचेंगे, और जंगल बचेंगे तो हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।

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