
नई दिल्ली। साने ताकाइची ने अक्टूबर में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनकर इतिहास रच दिया। अब उन्हें यह तय करना होगा कि क्या वह सूमो रिंग में महिलाओं के जाने पर लगने वाली रोक को हटा पाएंगी? रविवार को खत्म होने वाले क्यूशू ग्रैंड सूमो टूर्नामेंट के विनर को प्राइम मिनिस्टर कप दिया जाएगा। इस कप को देने के लिए पहले कुछ पुरुष प्रधानमंत्री रिंग में आ चुके हैं। ताकाइची जापान के पारंपरिक जेंडर और पिता के मूल्यों का समर्थन करने वाली एक पक्की कंजर्वेटिव हैं और शायद इस टैबू को न तोड़ें।
इस टैबू को लेकर बहस जारी
लेकिन महिलाओं के खिलाफ टैबू पर बहस शायद जारी रहेगी और इसका एक बड़ा कारण यह है कि अब जापान को एक महिला लीड कर रही है। इस बात की भी आलोचना हो रही है कि सूमो और दूसरी धार्मिक जगहों पर बैन जापानी समाज में महिलाओं की बदलती जगह से मेल नहीं खाता।
सूमो रिंग विवाद का केवल एक हिस्सा है। जापान में सदियों से महिला भक्तों को कुछ पवित्र पहाड़ों, धार्मिक ट्रेनिंग सेशन, मंदिरों, धार्मिक स्थलों और त्योहारों में जाने से मना किया गया है।
जापान में महिलाओं को लेकर कई मान्यताएं
आइची गाकुइन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और धर्म और जेंडर की एक्सपर्ट नाओको कोबायाशी का कहना है कि दुनिया में दूसरी जगहों पर भी ऐसे ही टैबू हैं, लेकिन जापान में जो टैबू है वह पीरियड्स और बच्चे के जन्म से जुड़ी महिलाओं की “अशुद्धि” की मान्यता के साथ-साथ कुछ औरतों से नफरत करने वाले बौद्ध विचारों से उपजा है।



















