
नई दिल्ली। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायपालिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि महिलाएं न्याय के लिए कोई अलग मानदंड नहीं लाती, लेकिन उनके जीवन के अनुभव न्यायिक दृष्टिकोण को अधिक व्यापक और संवेदनशील बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में महिलाओँ की बढ़ती भागीदारी से अदालतें समाज की वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से समझ पाती हैं और इससे न्याय व्यवस्था मजबूत होती है। सीजेआइ ने हाई कोर्ट कोलेजियम से अपील की है कि योग्य महिला अधिवक्ताओं को न्यायाधीश पद पर नियुक्ति के लिए प्राथमिकता से विचार किया जाए।
भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा की गई
प्रधान न्यायाधीश ने ये बात इंडियन वोमेन इन लॉ संस्था द्वारा आयोजित पहले राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही। हॉफ द नेशन हॉफ द बेंच विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में कानून के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका और उनकी भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा की गई। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली में आयोजित किया गया था। उद्घाटन सत्र में सीजेआइ सूर्यकांत ने कहा कि एक समय ऐसा था जब औपनिवेशिक दौर में महिलाओं को वकालत करने की अनुमति तक नहीं थी। बावजूद पिछली एक सदी में महिलाओं ने अपने परिश्रम और प्रतिभा के बल पर कानून के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।






























