सप्ताह में पांच दिन ही सरकारी कार्यालयों में काम, फिर भी रफ्तार कछुआ जैसी

सरकारी व्यवस्था एक बार फिर हड़ताल की चपेट में, लोग भी परेशान
कोरबा। वर्ष 2026 की शुरुआत से ठीक पहले जिले के सरकारी कार्यालयों के अलावा स्कूलों में कामकाज लगभग ठप हो गया है। कारण यह है कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने हड़ताल का आह्वान किया है जो तीन दिन तक चलना है। इसलिए स्थानीय कार्यालयों में ताले लटके हुए हैं। इन सबसे अलग हटकर महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पिछली सरकार द्वारा सप्ताह के कार्य दिवस कुल पांच दिन किए जाने की व्यवस्था अभी भी जारी है और इस पर भी सरकारी कामकाज की रफ्तार कछुआ जैसी है, इससे लोग परेशान हैं।
अधिकारी-कर्मचारियों की हड़ताल का आज दूसरा दिन है। 29 से 31 दिसंबर तक यह प्रभावी रहेगी। जिले में करीब 20 हजार और प्रदेश में 4 लाख 75 हजार कर्मचारियों अधिकारियों के हड़ताल पर होने का दावा किया गया है।
सामूहिक रूप से 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर शासन द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश स्तरीय निर्णय के तहत कोरबा जिले में हड़ताल की शुरुआत की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कमचारियों अधिकारियों की हड़ताल के चलते प्रशासनिक और अन्य शासकीय कार्यालयों में ताले लटके नजर आए।
ताले लटका देख लोग बैरंग लौटे
जिला मुख्यालय सहित ब्लॉक मुख्यालय में अपने कार्यों से सरकारी कार्यालय पहुंचे नागरिकों को वहां पर ताले लटके नजर आए। जानकारी मिली कि सरकार के द्वारा रखे गए कर्मी हड़ताल पर हैं इसलिए कोई काम नहीं हो सकते। यह नजारा देखकर लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। उन्हें बताया गया है कि 31 दिसंबर तक यही स्थिति रहेगी, इसलिए अपने कामकाज के मसले पर वे नए वर्ष में ही यहां का रूख करें।
कमजोर बच्चों को आखिर कैसे बनाएं दक्ष
पूर्व कलेक्टर अजीत वसंत ने मौजूदा शिक्षा सत्र में खासतौर पर सरकारी स्कूलों में बोर्ड परीक्षा के नतीजों को सुधारने के लिए चिंता की थी और विशेष रूप से कमजोर बच्चों को सुधारने के लिए नया प्रयोग किया। प्राचार्यों और शिक्षकों को उनके लिए विशेष रूप से काम करने के निर्देश दिए गए। अपेक्षा की गई कि यह काम जमीन पर दिखना चाहिए। फरवरी-मार्च में बोर्ड की परीक्षाएं होना है। इन सबसे पहले हड़ताल में शिक्षकों की संलग्नता के मायने और परिणाम पर होने वाले प्रभाव को इससे यूं ही समझा जा सकता है।
पहले अवकाश, फिर जश्न की स्थिति
गुरुवार 1 जनवरी से कैलेंडर वर्ष 2026 की शुरुआत हो रही है और इसके ठीक एक दिन पहले कर्मियों की हड़ताल समाप्त होना है। ऐसे में इस बात की संभावना कम है कि अधिक संख्या में कर्मी एक जनवरी को कार्यालय पहुंचेंगे। जबकि इसके अगले दिवस यानि 2 जनवरी को सप्ताह का अंतिम कार्य दिवस है। मानसिकता यही है कि अंतिम कार्य दिवस को विलंब से कार्यालय पहुंचा जाए और शेड्यूल से पहले ही अपने गंतव्य का रूख कर लिया जाए। इसके अगले दो दिन शनिवार और रविवार को अवकाश रहेगा, यानि जश्न। ऐसे में सोमवार को भी सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति प्रभावित होना स्वाभाविक है। इन सबके बीच समझा जा सकता है कि सरकारी कार्यालयों में फाइलों की पेंडेंसी का बोझ बढ़ क्यों रहा है और इन सबके चक्कर में आम लोगों को मुश्किलों से दो-चार होना पड़ रहा है।

RO No. 13467/10