
वाशिंगटन, २५ नवंबर। उत्तर कोरिया द्वारा एक जासूसी उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने पर दुनियाभर में हड़कंप मच गया है। उत्तर कोरिया ने इस साल कई प्रयास के बाद अपना जासूसी उपग्रह स्थापित किया है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के शीर्ष राजनयिकों ने चर्चा की।अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के शीर्ष राजनयिकों ने उत्तर कोरिया द्वारा हाल ही में एक जासूसी उपग्रह के प्रक्षेपण पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को एक बैठक की। उन्होंने बताया कि इस बैठक में उत्तर कोरिया की कड़ी निंदा की।विदेश विभाग ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री पार्क जिन और जापान के विदेश मंत्री कामिकावा योको ने क्षेत्र पर इसके अस्थिर प्रभाव के लिए (21 नवंबर) प्रक्षेपण की कड़ी निंदा की। उत्तर कोरिया ने मंगलवार को कहा कि उसने अपना पहला जासूसी उपग्रह कक्षा में स्थापित कर दिया है। वहीं, अब उत्तर कोरिया को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा मिल रही है, जो बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर लागू प्रौद्योगिकी के उपयोग पर रोक लगाता है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने कहा कि यह प्रक्षेपण आत्मरक्षा के अधिकार का अभ्यास था। सितंबर में किम जोंग ने रूस की यात्रा की थी, और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मुलाकात की थी। इसके बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने किम जोंग को उपग्रह बनाने में मदद करने की बात कही थी। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने कहा कि नवीनतम प्रक्षेपण में संभवत: बढ़ती साझेदारी के तहत रूसी तकनीकी सहायता शामिल है, जिसमें प्योंगयांग ने रूस को लाखों तोपखाने के गोले की आपूर्ति की है।





















