उप तहसील का दर्जा मिलने के बावजूद चैतमा में बुनियादी सुविधाओं का अभाव

कोरबा। पाली ब्लॉक की ग्राम पंचायत चैतमा आबादी और क्षेत्रफल की दृष्टि से काफी बड़ा है। बावजूद इसके इस पंचायत का यथोचित विकास वर्षों से नहीं हो पाया है। करीब 10 हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायत में बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। विकास के नाम पर जनप्रतिनिधियों के साथ ही जिला प्रशासन द्वारा भी सिर्फ ध्यान नहीं दिया गया है। चैतमा पंचायत पर आसपास के 30 गांवों के लोग निर्भर हैं। हायर सेकंडरी तक शिक्षा, बिजली विभाग का कार्यालय, अस्पताल, राजस्व, बैंक हो या वन विभाग से जुड़ा मामला हो या हाट बाजार से। पंचायत से खाद उठाव का मामला हो या धान बिक्री का, क्षेत्र के लोगों को चैतमा आना ही पड़ता है। सुविधा बढ़ाने के नाम पर गांव को उप तहसील का दर्जा दे दिया गया है, लेकिन हकीकत में जमीनी स्तर पर उप तहसील का काम यहां होता ही नहीं है। सप्ताह में एक दिन लिंक कोर्ट जरूर लगता है, पर उसका कोई खासा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। ग्राम पंचायत इरफ, पटपरा के बखई और हर्राडीह ऐसे गांव हैं, जहां पहुंच मार्ग नहीं होने के कारण आवागमन के साधन नहीं मिल पाते हैं। गंभीर बीमारी अथवा डिलीवरी के स्थिति में मरीज को खाट पर लिटाकर अस्पताल ले जाते देखा जा सकता है। नहीं खुला कॉलेज पाली और कटघोरा पर आश्रित हैं छात्र चैतमा में हायर सेकंडरी स्कूल खुले लगभग 40 साल हो गए हैं। उच्च शिक्षा के लिए पंचायत समेत आसपास के 30 गांवों के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई करने के लिए पाली या कटघोरा जाना पड़ता है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से लगातार कॉलेज खोलने की मांग की जाती रही है, लेकिन अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। 15 साल पहले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मांग की गई थी, तब उन्होंने एक नहीं, बल्कि दो बार कॉलेज खोलने का आश्वासन दिए थे। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि इस मांग को पूरा कराने में अब नाकाम है। अब तक वन परिक्षेत्र कार्यालय का वादा भी नहीं हुआ पूरा ग्राम पंचायत चैतमा में वन परिक्षेत्र कार्यालय खोलने की मांग भी पुरानी है। बीते वर्ष वर्तमान सांसद चैतमा प्रवास पर थीं। तब उनसे परिक्षेत्र कार्यालय नहीं होने से समस्याओं से अवगत कराते हुए मांग की गई थी। इस पर उन्होंने मौके से ही वन विभाग को निर्देशित भी किया था, लेकिन आज तक वन परिक्षेत्र कार्यालय नहीं खुल पाया है। परिक्षेत्र कार्यालय नहीं होने से जंगल में होने वाली अवैध कटाई, बेजा-कब्जा समेत अन्य अवैधानिक कार्यों पर अंकुश नहीं लग पाता है।

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