
नगरीय निकाय चुनाव को लेकर यही हैं खास मुद्दे
कोरबा। नगरीय निकाय चुनाव निर्धारित समय से कुछ विलंब से संपन्न हो रहे हैं। इसके लिए कार्यकर्ताओं के साथ-साथ दावेदारों को काफी इंतजार करना पड़ा। हालांकि निर्वाचन की तैयारियां कुछ समय से चल रही थी पर घोषणा देर से हुई। आनन-फानन में घोषित कार्यक्रम से प्रत्याशियों के साथ कार्यकर्ताओं को चुनाव मैदान में कूदने के लिए कम समय मिला। छत्तीसगढ़ में सत्तासीन भाजपा एक वर्ष की उपलब्धियों के सहारे लोगों के पास पहुंच रही है तो सरकार के कार्यों में कमियां निकालने का काम कांग्रेस कर रही है।
कोरबा जिले में एक नगर नगर पालिक निगम, तीन नगर पालिका और दो नगर पंचायत संस्थाएं कार्यरत हैं जिनमें एकमात्र चरण में 11 फरवरी को महापौर से लेकर अध्यक्ष व पार्षदों का निर्वाचन होगा। जिले के शहरी मतदाताओं को अपना प्रतिनिधि चुनने का अवसर निर्वाचन आयोग की ओर से दिया जा रहा है। पिछले चुनाव के लिहाज से इस बार प्रमुख पदों के लिए लोग वोट करेंगे और इससे तय होगा कि उनके लिए खास चेहरा कौन रहा। आम चुनाव की तरह स्थानीय चुनाव में भी मुद्दे काफी कारगर होते हैं और जनता इसके जरिए अपना मूड बनाती है कि निर्णय किस तरह से लेना है।
छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव के नेतृत्व वाली सरकार को एक वर्ष का समय पूरा हो चुका है। उसने इस दौरान राज्य के विकास को लेकर काम किया है। अधोसंरचना के साथ-साथ सडक़ संपर्क, लोक स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, महिला सशक्तिकरण, युवाओं को रोजगार, कृषि विकास और कौशल विकास समेत जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों को बढ़ावा देने के काम इसमें शामिल हैं। हितग्राहीमूलक योजनाओं के माध्यम से भी लोगों को अपने पक्ष में करने का काम जारी है। निकाय चुनाव में मोदी की गारंटी और विष्णुदेव के काम को आधार बनाकर सभी निकायों के प्रत्याशी लोगों के पास पहुंच रहे हैं। हालांकि उन्होंने स्थानीय स्तर पर मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करने और पिछली सरकार में लंबित कार्यों को आगे बढ़ाने का मुद्दा भी बढ़ाया है। इसके उल्टे कांग्रेस विपक्ष में है इसलिए वह आलोचनात्मक तरीके से अपनी उपस्थिति लोगों के बीच दर्ज कराने की कोशिश में है। प्रदेश सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल को वह लगातार नाकाम कहती रही है। इसके अलावा अब चुनाव के दौर में सरकार के कार्यों की कमियां निकालने के अतिरिक्त पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के द्वारा पांच वर्ष में छत्तीसगढ़ के लिए किये गए कार्यों का बखान करना जरूरी हो गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि स्थानीय चुनाव में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों की भूमिका नगण्य होती है इसलिए उन्होंने सिर्फ अपने आसपास की समस्याओं और जरूरतों पर फोकर किया है।