कई कारणों से जिले में टीबी के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी

जांजगीर-चांपा । नशा, कुपोषण और जागरूकता की कमी से जिले में क्षय रोगियों की संख्या में अपेक्षाकृत कमी नहीं आ रही है। जिले में जनवरी 2023 से लेकर अब तक 22973 लोगों की जांच की गई है जिसमें 974 मरीज मिले हैं। जिनका उपचार डाट्स पद्धति से किया जा रहा है। टीबी का इलाज संभव है। टीबी के मरीजों का पूरा कोर्स पक्का इलाज ही टीबी से छुटकारा दिला सकता है।स्वास्थ्य विभाग के जिला क्षय नियंत्रण शाखा द्वारा टीबी संभावित मरीजों की जांच व मरीजों के नियंत्रण करने के लिए पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। बावजूद इसके टीबी के मरीजों में अपेक्षाकृत कमी नहीं आ रही है। राष्ट्रीय औसत के हिसाब से मरीजों की संख्या 26 सौ होनी चाहिए है। वर्तमान में जिले में टीबी के 974 मरीज हैं। जिनका उपचार डाट्स पद्धति से किया जा रहा है। उद्योगों से पुैल रहे पर्यावरण प्रदूषण, नशा, कुपोषण और जागरूकता की कमी के साथ ही जनसंख्या बढऩे के कारण क्षय रोगियों की संख्या बढ़ रही है। अविभाजित जांजगीर चांपा जिले में वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के चलते संभावित मरीजों की जांच में कमी आई थी इसके चलते मरीजों की संख्या 1449 थी। वर्ष 2021 में जांच में और कमी आने के कारण 1414 मरीज मिले थे। कोरोना संक्रमण समाप्त होने के बाद वर्ष 2022 में क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम टीबी मुक्त भारत अभियान के अन्तर्गत इंडियन कौंसिल आपु मेडिकल रिसर्च ने प्रदेश के 8 जिलों बस्तर, कोरिया, महासमुंद, रायगढ़, गरियाबंद, राजनांदगांव, कांकेर और जांजगीर – चांपा जिले का चयन किया था। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा घर – घर दस्तक देकर सर्वे किया था जिसके पुलस्वरूप जिले में 1603 मरीजोंकी पहचान की गई थी। वहीं इस वर्ष से सक्ती जिला अलग होने के बाद जांजगीर चांपा जिले में जनवरी 2023 से 22973 लोगों की जांच की गई है जिसमें 974 मरीज मिले हैं। टीबी के मरीज को तीन श्रेणी में बांटा गया है। पहला पाजिटिव, दूसरा एक्सा पल्मोनरी व तीसरा एमडीआर है इसमें पाजिटिव व एमडीआर के मरीज ही बीमारी दूसरों में फैलाने की क्षमता रखते हैं। एक मरीज सालभर में 12 से 15 लोगों को संक्रमित कर सकता है। खास बात यह है कि एमडीआर का मरीज दूसरे लोगों को भी इसी बीमारी से संक्रमित करता है। ऐसे में एमडीआर टीबी के इलाज के लिए 24 से 27 माह की खुराक दी जाती है। एक मरीज 10 से 12 लोगों को करता है संक्रमित टीबी रोग कितना घातक है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बच्चों के जन्म के बाद पहला टीका ही टीबी से बचने के लिए बीसीजी का लगाया जाता है। टीबी के विषाणु खुले वातावरण में कहीं भी पुैल सकता है। एक टीबी के मरीज का समय पर इलाज नहीं होने पर वह 10 से 12 लोगों कोसंक्रमित सकता है। ऐसे में यदि टीबी के लक्षण दिखाई दे तो अस्पताल जाकर टीबी की जांच कराएं।

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