
कोरबा। ठंड के सीजन की शुरुआत होने के साथ नगर और विभिन्न क्षेत्रों में कुत्तों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। इसी के साथ समूह में विचरण करते हुए लोगों पर हमले की घटनाएं भी बढ़ गई है। ऐसे में हर कहीं खतरे बने हुए हैं और लोग चिंतित हैं। कुत्तों से मारपीट करने के मामले पर संज्ञान लेने वाले संगठन इंसानों पर होने वाली घटनाओं के मामले में शांत हैं और सरकार के स्तर पर भी कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। जबकि चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने ऐसे ही मसलों को लेकर अब किसी व्यक्ति के साथ घटना होने पर राज्य सरकार पर जवाबदेही तय करने की बात कही है।
कोरबा में खासतौर पर कुत्तों की चिंता करने के लिए कुछ संगठन के लोग ज्यादा ही सक्रिय हैं। जिनकी प्राथमिकता केवल इस बात पर है कि किसी भी कारण से लोग सामान्य या पागल कुत्तों को परेशान न करें। इस बारे में किसी भी स्तर से मिली शिकायत पर नई दिल्ली से लेकर कोरबा से फोन आने शुरू हो जाते हैं और लोगों पर दबाव भी बनाया जाता है। लेकिन इससे अलग हटकर कुत्तों के द्वारा किये जाने वाले हमलों और उनमें घायल होने के साथ कई प्रकार से परेशानी झेलने वाले इंसानों के मामलों में संगठन की संवेदनहीनता जस की तस है। कोरबा नगर के शारदा विहार, मुड़ापार, एमपीनगर, आईटीआई और अन्य क्षेत्रों में इन दिनों कुत्तों के झुंड नजर आ रहे हैं जो आवाजाही करने वालों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने लोगों को चिंतित किया है। वहीं किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने से नाराज भी कर दिया है। उधर चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने 193 याचिकाओं की सुनवाई करने के साथ कहा है कि अगर इस प्रदेश में कुत्तों के काटने की घटनाएं होती है तो उसके लिए राज्य सरकार दोषी होगी और पीडि़त व्यक्तियों को 10 हजार व 20 हजार रुपए तक की क्षतिपूर्ति देनी होगी।
















