केंद्र का नक्सलवाद के खिलाफ अभियान, आत्मसमर्पण करने पर इनाम, नहीं तो पाताल से भी खोजकर मारने का ऐलान

रायपुर, १४ सितम्बर।
छत्तीसगढ़ की नई नक्सल पुनर्वास नीति में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के सुरक्षित भविष्य का पूरा इंतजाम किया जा रहा है। इसके तहत नक्सलियों को जिला स्तर पर नामित अधिकारी की देख-रेख में तीन साल गुजारने होंगे। इस दौरान उनको दस हजार रुपये का मासिक भत्ता दिया जाएगा। संगठन में अहम स्थान रखने वाले नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने पर पांच लाख रुपये दिए जाएंगे, जबकि मध्यम व निचले स्तर के नक्सलियों को 2.5 लाख रुपये अनुदान के तौर पर मिलेंगे। यह राशि आत्मसमर्पण के तीन साल बाद आचरण व व्यवहार के आधार पर दी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य की नई नक्सल पुनर्वास नीति अक्टूबर 2024 तक तैयार कर ली जाएगी। केंद्र और राज्य के समन्वय से चल रहे नक्सल विरोधी अभियान के तहत सरकार का स्पष्ट मत है कि या तो नक्सली आत्मसमर्पण करें नहीं तो उन्हें खत्म करने के लिए अभियान चलता रहेगा। गत 23 से 25 अगस्त तक छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि नक्सली आत्मसमर्पण करें नहीं तो पाताल से भी खोजकर उन्हें मारेंगे। केंद्र ने नक्सलियों का पूरी तरह सफाया करने के लिए मार्च 2026 तक का लक्ष्य निर्धारित कर लिया है। इस साल 153 से ज्यादा नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। बस्तर में सुरक्षा शिविरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के न्यायालयीन मामले सुलझाने के लिए पुलिस की मदद मिलेगी।
उन्हें कौशल विकास योजना से जोडक़र हुनरमंद बनाया जाएगा। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास शिविरों का आयोजन किया जाएगा। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के हथियारों जैसे एके 47, एसएलआर, भरमार बंदूक, पिस्टल का मूल्यांकन कर उसकी राशि दी जाती है। यह राशि भी बढ़ाई जाएगी।
उन्हें निवास के लिए मनचाहे शहर या गांव का विकल्प दिया जाएगा। कम ब्याज पर लोन मिलेगा।उप मुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर के युवा नक्सली ना बनें। जो नक्सली हैं वे सरेंडर करें, मुख्य धारा में आएं। भटके हुए युवाओं से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सभी ने कहा है मुख्य धारा में जुड़ें, जीवन आगे बढ़ाएं।

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