
कोरबा। अभी मेरी उम्र 60 वर्ष है पर जब कमला नेहरु महाविद्यालय खुला था, तब मैं आठ साल का था। हम चारपारा में रहते थे और नदी पर पुल भी नहीं बना था। गर्मी का मौसम आने पर उस पार के लोगों के लिए कोरबा शहर आने-जाने रपटा बनता था। तब के दौर में ऐतिहासिक रानी महल और जिले के पहले कॉलेज को सिर्फ देखने की ललक में हम लोग नाव से नदी पारकर आते थे। भले ही संख्या कम हो गई, हो पर क्षेत्र के ग्रामीण व शहरी बच्चों की उच्च शिक्षा की राह प्रशस्त करने में कमला नेहरु कॉलेज दशकों से महत्वपूर्ण योगदान अर्पित कर रहा है। समाज को उच्च शिक्षित युवाओं की भेंट दे रही इस संस्था को बेहतर पायेदान पर ले जाने में उचित योगदान अर्पित कर सकूं, इस दिशा में शत-प्रतिशत प्रयास करुंगा। यह बातें सोमवार को आयोजित कमला नेहरु महाविद्यालय के वार्षिकोत्सव समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग व श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहीं। प्राचार्य डॉ प्रशांत बोपापुरकर ने कॉलेज का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए 52 वर्षों के इतिहास और उपलब्धियों की रुपरेखा कैबिनेट मंत्री श्री देवांगन के समक्ष रखी। वर्तमान परिस्थितियों से अवगत कराते हुए शासन के सहयोग की अपेक्षा भी जताई। मंच संचालन अंग्रेजी विभागाध्यक्ष ब्रिजेश तिवारी ने किया।अध्यक्ष किशोर शर्मा ने रखी कॉलेज के शासकीयकरण की मांग, मंत्री लखन बोले- हर संभव प्रयास करेंगे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय समिति के अध्यक्ष किशोर शर्मा ने कहा कि वर्ष 1971 से प्रारंभ होकर कमला नेहरु कॉलेज ने समाज के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जो योगदान दिया है, वह अपने आप में ऐतिहासिक है।




















