
सक्ती। सक्ती रेलवे स्टेशन एवं प्लेट फार्म की दुर्दशा का क्रमबद्ध तरीके से ज़िक्र करतें हैं। स्टेट समय का मशहूर सुघड़ तरीके से बना यह स्टेशन जहां यात्रि बड़े आराम से लोहपथ गामीनी में सवार हो अपने गंतव्य तक पहुंचते थे। हां उस वक्त यहां कुछ यात्री सुविधाओं का अभाव था। सक्ती जिले की जनता सहित क्षेत्रवासी चाहते थे कि,स्टेट, समय के इस रेल्वे स्टेशन और प्लेटफ़ॉर्म में कुछ जरुरी सुविधाओं को अगर यहां के सांसद, विधायक एवं क्षेत्रीय नेता गंभीरता से लेते तो जो कि जनप्रतिनिधि होने के नाते उनका कर्तव्य भी बनता है। विडंबना देखिए जनता की सुविधाओं के लिए तत्पर रहने की बात करने वाले भाजपा सरकार केंद्र में आसीन हैं। और उनका एक ही मंत्र है उन्नतिशील भारत का, मोदी की गारंटी का वायदा को मान जांजगीर-चांपा लोकसभा से जनता ने लगातार भाजपा से कभी कमला पाटले तो कभी गुहाराम अजगल्ले को सांसद चूना। दोनों ही सांसदों ने स्टेट समय के सुघड़ तरीके से संवारें गए रेल्वे स्टेशन एवं प्लेटफ़ॉर्म को क्या क्या दिया इसका भी जिक़्र इस स्टेशन से अपने गंतव्य तक यात्रा करने वाले यात्री उसके नफे नुकसान को बताते हैं। सक्ती जब तहसील हुआ करता था तब यहां रेलवे स्टेशन से गाड़ी पकडऩा बड़ा आसान हुआ करता था रिक्शे से उतरते ही कुछ कदम की दूरी पर टिकट घर हुआ करता था। जहां टिकट ले सीधे एक नंबर प्लेटफार्म और वही से लगी साडिय़ां जो दूसरे नंबर प्लेटफार्म को जाती थी। अब जब सक्ती जिला बन गया है केन्द्र में भाजपा की सरकार है जांजगीर-चांपा लोकसभा से सांसद भी भाजपा के ! अब यह भी जानना जरुरी है होगा कि भाजपा के इन सांसदों ने सक्ती रेलवे स्टेशन पर क्या-क्या सुविधाएं बनाम दुविधाएं यात्रियों को मुहैया कराई। सबसे पहली सुविधा बनाम दुविधा एक नंबर प्लेटफार्म पर जाने के लिए दम फूलाने वाली मूंह बाए बडी और खडी साडिय़ां। टूटी-फूटी कुर्सियां, पेय जल को चिन्हांकित करने वाले नल जो कभी तो लगातार बहते हैं कभी सुखे पड़े रहते हैं। ट्रेनों के लिए डिस्प्ले तो लगा है किन्तु वह भी आपनी मर्जी का राजा कभी काम करता है कभी नहीं। शौचालय की स्थिति तो वाकई सोचनीय है। अब लोकसभा चुनाव सर पर रेलवे स्टेशन की सोचनीय दशा यथा संभव होने वाले लोकसभा चुनाव में नेताओं की सोचनीय दशा में तब्दील हो सकती है।
























