
जांजगीर-चांपा। जिले में सिटी बस सेवा तीन साल से बंद पड़ी हुई है। इसे फिर से शुरू करने की दिशा में प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया गया और न ही जनप्रतिनिधियों ने कोई पहल की। जिसके चलते टर्मिनल में खड़े बसों के कीमती सामान गायब हो गए। न सीट बची है और न चक्के बचे हैं। करोड़ों की सिटी बस कबाड़ में तब्दील हो गई। देखरेख के अभाव में बसों के कल पुर्जे चोरी हो गए। कोरोना काल में बसों का परीचालन बंद कर दिया गया था।उसे फिर से बहाल नहीं किया गया। पड़ोसी जिले बिलासपुर, कोरबा और रायगढ़ में सिटी बस सेवा सुरू होने पर उम्मीद जताई जा रही जो कि जल्द यहां भी सिटी बसों का पुन: संचालन शुरू हो सके। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने कोई रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में अब फिर से सिटी बस सेवा शुरू होने की उम्मीद कम दिख रही है। जिला मुख्यालय जांजगीर से नवंबर 2015 में सिटी बस सेवा का शुभारंभ हुई भी और सबका परमिट जारी किया गया। जिला परिवहन कार्यालय द्वारा 7 अक्टूबर 2020 तक के लिए परमिट जारी किया गया। मगर अकलतरा से शिवरीनारायण होते हुऐ पामगढ़, शिवरीनारायण से अकलतरा, बलौदा से चांपा, चांपा से अकलतरा और नैला से चाम्पा तक सिर्फ पांच बसों का संचालन हुआ। ऐसे में जिलेवासियों को सभी सिटी बसों का लाभ नहीं मिला। जबकि पांच बसें पूल खाली पड़ी रही। जिन मार्गों पर के दो बसें चलनी थी उन मार्गों पर एक-एक बस ही चलाया गया। । ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सिटी बस के अभाव में ज्यादा रूपए खर्च कर आना जाना करना पड़ा। रायगढ़ नगर निगम प्राधिकरण के तहत 4 करोड़ 80 लाख की लागत से 10 सिटी बसों की खरीदी की गई थी। जिसे जिले में परिचालन के लिए भेजा गया था ताकि लोगों को आवागमन में सहूलियत मिल सके और आटो रिक्शा के मनमाना किराया से राहत मिल सके। सभी बसे शहर के बस स्टैंड नैला में कबाड़ की हालत में पड़ी हुई हैं। असामाजिक तत्वों ने बसों को आग के हवाले भी कर दिया था। इन बसों के पहिये, इंजन और बैटरी गायब हो चुके हैं, शीशे टूट चुके हैं। विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण करोड़ों रुपए के बस कबाड़ हो गए। इन बसों की देखरेख का जिम्मा नगरपालिका के पास था और परमिट वगैरह परिवहन विभाग देखता था। साल 2015 में राज्य सरकार ने रायगढ़ नगर प्राधिकारण के तहत जांजगीर में 10 बसों के संचालन की अनुमति मांगी थी। 10 बसें जांजगीर-चांपा जिले में आई थी जिसमें से 5 बसों को परमिट नहीं मिला था। ऑटो वाले वसूल रहे मनमाना किराया संचालक ने कोरोना के दौरान घाटा होने की बात कहते हुए बसों का परिवहन बंद कर दिया था। शहर के लोगों को फिर से सिटी बस की सुविधा कब मिलेगी?कहा नहीं जा सकता। फिलहाल तो लोग अधिक पैसा खर्च कर आटो रिक्शा या अन्य साधन से आने जाने को मजबूर है। आटो रिक्शा चालक मनमाना किराया वसूल रहे है। । आटो के लिए निर्मित प्री-पेड बूब भी बंद हो गया है।



















