
शिमला, १२ मार्च । हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा-2022 के प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 88 आरोपितों के विरुद्ध दो आरोपपत्र दायर किए हैं। शिमला की अदालत के समक्ष सोमवार को आरोपपत्र दायर किए गए। जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र तीन से पांच लाख रुपये में बेचे गए थे। आरोपितों के बैंक खातों से 1.25 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। इसके अतिरिक्त जांच के दौरान रिकार्ड में चूक व लापरवाही के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस के तत्कालीन अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी गई। सीबीआई जांच और आरोपपत्रों के अनुसार दो आरोपितों (बिहार निवासी) ने अन्य के साथ मिलकर प्रश्नपत्र को चुराने व दुरुपयोग करने की साजिश रची। आरोपितों के बैंक खातों में 1.25 करोड़ रुपये स्थानांतरित किए गए। मामले में छह राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड, दिल्ली व हरियाणा स्थित संगठित समूहों की सांठगांठ का पता चला है। बिचौलियों के माध्यम से मंडी, कांगड़ा, चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर व मोहाली आदि में तीन से पांच लाख रुपये में अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र दिए गए। सीबीआई ने पुलिस थाना गगल की एफआईआर और पुलिस थाना सीआईडी शिमला की एफआईआर के तहत जांच हाथ में ली थी। जांच के दौरान भारतीय रेलवे व हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग से संबंधित तत्कालीन लोक सेवकों की भूमिका, हिमाचल के जेई और जेओए (बिजली बोर्ड), चंडीगढ़ पुलिस के तत्कालीन कांस्टेबल, दिल्ली सरकार के तत्कालीन अधिकारी, एक पूर्व सैनिक और तत्कालीन रक्षा लेखा और अधिकारी की भूमिका सामने आई है। एनटीए को जांच में यह भी पाया गया कि नालंदा (बिहार), कांगड़ा (हिमाचल), रोहतक (हरियाणा), दिल्ली और जम्मू में विभिन्न निजी संस्थान चलाने वाले लोगों ने मिलीभगत की। उनके विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया गया।उचित कार्रवाई के लिए संस्थानों के नाम एनटीए (राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी) को भेजे जा रहे हैं, क्योंकि जांच के दौरान उनकी भूमिका भी रिकार्ड में आई है।क्या था मामलाहिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती के लिए 27 मार्च, 2022 को लिखित परीक्षा करवाई गई।इस संबंध में जब चार मई को धर्मशाला में प्रमाणपत्र जांच के लिए तीन अभ्यर्थी मुनीष कुमार, मनी चौधरी और गौरव आए तो उनसे प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम पूछा गया। उन्हें इसका पता नहीं था। इसके बाद जांच में कई अहम जानकारियां मिलीं।अलग-अलग स्थानों पर पेपर रटाए जाने और लीक होने का पता चला। पेपर लीक मामले में शुरुआत में पकड़े तीन आरोपित युवकों में से दो को लिखित परीक्षा से एक दिन पहले 26 मार्च को गगल में टाइप्ड पेपर में प्रश्न और उत्तर रटाए गए थे।दोनों युवकों के दसवीं कक्षा में 50 प्रतिशत से कम नंबर थे, लेकिन कांस्टेबल लिखित परीक्षा में इनके 90 प्रतिशत से अधिक नंबर आए। जांच में पता चला कि प्रदेश के चंडीगढ़ और अलग-अलग स्थानों पर बिचौलियों के माध्यम से उत्तरों को रटाया गया। ————–





















