दुश्मनों जैसा व्यवहार हो रहा था कार सेवकों के साथ

सैकड़ो वर्षों का दर्द मिटा 30 साल के संघर्ष में
कोरबा। 1990 का वह दौर जब लाखों की संख्या में पहुंचे कार सेवकों ने अयोध्या में रामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में हिस्सा लिया, तब तत्कालीन उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ-साथ फर्जी तरीके से भर्ती किए गए जवानों ने उन पर इस अंदाज में लाठियां बरसाई जैसे दुश्मनों के साथ व्यवहार किया जाता है। हजारों राम भक्त को यातना दी गई और अस्थाई जेलों में डाल दिया गया। सैकड़ो वर्षों से राम जन्मभूमि प्राप्त करने के लिए चल रहे प्रयासों पर 30 वर्षों में कानूनी और स्थाई लड़ाई के साथ हमने विजय प्राप्त कर ली, यह बेहद खुशी की बात है।
1990 और 1992 में अयोध्या कार सेवा में शामिल हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व शाखा प्रबंधक राम किशोर श्रीवास्तव को अत्यंत प्रसन्नता है कि आज उनकी आंखों के सामने न केवल राम मंदिर निर्माण का सपना पूरा हुआ बल्कि उसकी प्राण प्रतिष्ठा भी हो रही है। उनके समेत बहुसंख्यक समाज की पीड़ा यही थी कि उनके अपने आराध्य का मंदिर कब्जाया हुआ है, और समाज उस दर्द को झेल रहा है। जन्मभूमि को मुक्त करने का संकल्प वर्षों से किया गया और इसके लिए अनेक अवसरों पर संघर्ष हुआ। पता नहीं कितनी जिंदगियां इसके लिए न्योछावर हुए। कालांतर में आंदोलन तेज हुई और फिर एक प्रभावी योजना के साथ इस दिशा में आगे बढ़ा गया । 22 जनवरी को अयोध्या में निर्मित श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले अतीत के पन्ने सामने आ रहे हैं और संघर्ष में अपनी भूमिका निभाने वाले कई प्रसंग पर रोशनी डाल रहे हैं। रामकिशोर श्रीवास्तव भी इन्हीं में से एक है जिन्होंने 1990 में अयोध्या में हुई कार सेवा में हिस्सा लिया था। उन दिनों की याद ताजा करते हुए भी बताते हैं कि उनके समूह में राम प्रसाद राजपूत, सुरेश गुप्ता थे। जबकि अन्य समूह में किशोर बुटोलिया, जुड़ावन सिंह ठाकुर थे। कोरबा जिले से बड़ी संख्या में राम भक्त इस आंदोलन में भागीदारी करने के लिए रवाना हुए थे,, जिन्हें खास तौर पर उत्तर प्रदेश में उसे समय की मुलायम सिंह की सरकार के प्रकोप का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद वे थके नहीं और कई प्रकार की परेशानियां का सामना करने के साथ आखिरकार अयोध्या पहुंच गए।
ऐसा लगा जैसे कोई युद्धभूमि है
श्रीवास्तव बताते हैं कि हम सभी अपने लक्ष्य के साथ मौके पर पहुंचे थे और सब कुछ स्पष्ट था। उत्तर प्रदेश की जनता हमारे समर्थन में थी अगर विरोध में कोई था तो वह थी वहां की सरकार। वे बताते हैं कि फर्जी तरीके से मुस्लिमों की भर्ती पुलिस में सरकार के द्वारा की गई थी जो सीधे राम भक्तों पर अटैक कर रही थी और हर हाल में अपने इरादे दिखा रही थी। ऐसा लगा कि मानो हम कोई दूसरे देश के लोग हैं जिस पर दुश्मन की तरह हमला किया जा रहा है।
जगह-जगह बनाए थे जेल
बैंक की सेवा से निवृत होने के बाद अब सामाजिक क्षेत्र में काम कर रहे हैं रामकिशोर बताते हैं कि उस दौर में उत्तर प्रदेश सरकार ने राम भक्तों को रोकने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने के इरादे से हर जगह अस्थाई जेल बना दिए थे और यह कोशिश उन्हें हतोत्साहित करने की थी। इन सबके बावजूद हमारे मनोबल में कमी नहीं आई।
संकल्प सिद्धि की प्रसन्नता
रामकिशोर सहित लाखों करोड़ों भक्तों को इस बात की बेहद प्रसन्नता है कि आखिरकार उनके संकल्प सिद्धि पूरी हुई और राम मंदिर निर्माण का सपना पूर्ण हुआ। वर्षों तक जिसके लिए छटपटाहट रही और बहुत कुछ खोना पड़ा, आज राम मंदिर बनने से पुराना दर्द गायब हो गया। वे कहते है कि यह केवल मंदिर नही बल्कि राष्ट्र के मानबिंदु का एक शिखर भी है। जो विश्व को एक प्रभावी संदेश देता नजर आएगा।

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