दो बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च वहन करेगी व्याख्याता प्रशिक्षा सिंह

जांजगीर चंपा। जिले की एक शिक्षिका बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ गरीब शिक्षा के मुख्य धारा से जोडऩे के अलावा जिंदगी को भी रोशन कर रही है। इस वर्ष दो गरीब बच्चियों को गोद लिया। साथ ही कॉलेज तक जहां भी पढ़ाई करेगी। उसका पढ़ाई का पूरा खर्च भी उठाएगी। इसके साथ ही शिक्षिका सरकारी स्कूल के छात्रों का अन्य सहयोग जहां तक बन सके वो भी कर रही हैं। हम बात कर रहे है शासकीय हाईस्कूल मुलमुला की व्याख्याता प्रतिक्षा सिंह की। जो बच्चों को पढऩे के साथ-साथ उनके संपूर्ण विकास पर ध्यान देती हैं। उनकी मानसिक और आर्थिक स्थिति को समझकर उनकी समस्या का निराकरण करतीं हैं। हर साल अपने जन्मदिन पर अपने विद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं को कॉपी, पेन, पानी, बोतल, जूते, मोजे, स्वेटर एवं उनकी आवश्यकता की समस्त वस्तुएं स्वयं के वेतन से प्रदान करती है, ताकि कोई भी बच्चा पैसे के अभाव में शिक्षा से वंचित न रह जाए, जो बच्चे बोर्ड परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करते हैं, उन्हें नगद पुरस्कार देकर सम्मानित करतीं हैं। गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण कार्य करवातीं हैं। जिससे बच्चों में रुचि बढ़ेगा और वह नियमित विद्यालय आए, शिक्षा में रुचि बढ़ाने के लिए वह छत्तीसगढ़ी बोली का भी शिक्षण में प्रयोग करती हैं, ताकि ग्रामीण बच्चों सहज महसूस कर सकें। पिछले वर्ष शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री की घोषणा के तुरंत बाद दूसरे ही दिन इन्होंने अंग्रेजी की कविता को छत्तीसगढ़ी में अनुवाद कर पढ़ाया, जिसकी सराहना स्वयं मुख्यमंत्री एवं समस्त प्रदेशवासियों ने की स्कूल में होने वाली विभिन्न प्रतियोगिता में बच्चों के अच्छे प्रदर्शन पर किया। उन्हें प्रेरित करने के लिए सदैव पुरस्कृत करते रहतीं हैं। इस वर्ष अपने ही स्कूल की दो छात्रा गीता सिदार और सीता सिदार को उन्होंने गोद लिया है और वे दोनों जहां तक पढऩा चाहेंगे, कॉलेज की संपूर्ण पढ़ाई का खर्च स्वयं वहन करेगी। छात्रा के माता-पिता मजदूर हैं। प्रत्येक वर्ष में लगभग अपने दो माह का वेतन बच्चों के ऊपर खर्च करती हैं। प्रतिक्षा सिंह बताती है कि 2020 में अपने स्कूल में पढऩे वाले छात्र ईश्वर पटेल के दिल में छेद की जानकारी मिली। उसके पिता की मृत्यु बहुत पहले हो गई थी और मां भिक्षा मांगती थीं। जिसकी जानकारी होने पर उस बच्चे के ऑपरेशन की व्यवस्था की। आज वह बच्चा स्वस्थ है और 12वीं कक्षा उत्तीर्ण कर चुका है। इसके अलावा एक बच्ची को शासकीय हॉर्टिकल्चर कॉलेज से स्नाातक करवाया गया है। तनावरहित माहौल में रहकर सिखाती है पढऩा व्याख्याता प्रतीक्षा सिंह बच्चों को बाल मनोविज्ञान को समझकर उनसे जुड़कर उनका तनाव रहित माहौल में रहना सिखातीं हैं। बच्चे गरीबी या अन्य पारिवारिक स्थितियों के कारण स्कूल नहीं आते उन्हें स्कूल आने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने कुछ बच्चे जो डिप्रेशन में जा रहे थे, उनको पढ़ाई के प्रति लगाव बढ़ाने का उपाय कर उनकी काउंसलिंग कर उनको बोर्ड परीक्षा में सफलता दिलाई। कब और कहां से शुरू हुआ सेवाकाल प्रतिक्षा सिंह बताती है कि सहयोग करने की प्रेरणा मुझे मेरी बेटी से मिली। वह मुझे हमेशा गरीब असहाय लोगों को देखकर उनका सहयोग करने के लिए कहती थी, जब वह छोटी थी तो मेरे साथ स्कूल भी जाती थी, तब कोई बच्चा पैर में चप्पल नहीं पहने हो, कोई ठंड के मौसम में स्वेटर ना पहने हो तो वह कहती थी, मम्मी आपके बच्चों को ठंड नहीं लगती क्या या उनके पास चप्पल नहीं है, आप दे दो ना प्लीज। तब मुझे एहसास हुआ कि बच्चों के लिए कुछ करना चाहिए और तब से हर वर्ष उनका सहयोग करना प्रारंभ कर दिया।

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