
सक्ती । धान खरीदी के 22 दिन बाद भी केंद्रों में धान का अंबार लगा है। इसका उठाव नहीं होने के कारण केंद्र प्रभारी व सरकारी समिति के कर्मचारियों में आक्रोश है। उन्होंने इसके विरोध में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।खरीदी केंद्रों में बड़ी मात्रा में धान रखा हुआ है। गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे में धान सूख भी रहा है। डीएमओ द्वारा शीघ्र ही धान उठाव की बात कही जा रही है मगर उठाव की गति धीमी है। कई उपार्जन केंद्र में इतना अधिक मात्रा में धान रखा हुआ है कि केंद्र के प्रभारी जितनी मशक्कत खरीदी के समय नहीं किए थे उससे ज्यादा अब खरीदी बीत जाने के बाद धान के रख रखाव के लिए करना पड़ रहा है। इस संबंध में सहकारी कर्मचारी संघ सक्ती द्वारा कई बार मौखिक और लिखित रूप से जानकारी संबंधित अधिकारियों को देकर धान उठाव की मांग की जा चुकी है। इसके लिए एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन भी किया जा चुका है। उसके बाद भी हल नहीं निकलता देख अब सहकारी कर्मचारी संघ जिला सक्ती के पदाधिकारी अनिश्चितकालीन धरने पर चले गए। कर्मचारियों का कहना है कि धान खरीदी से पहले अधिकारी पूरा विश्वास दिलाते हैं कि 72 घंटे के अंदर खरीदी की गई पूरा धान का उठाव हो जाएगा परंतु 22 दिन बीत जाने के बाद भी धान का उठाव नहीं हुआ है। आंदोलनकारियों का कहना है कि धान में सूखत आ रही है। इसके लिए खरीदी प्रभारी को जिम्मेदार न माना जाए। समितियों को होने वाले शॉर्टेज एवं नुकसान की क्षतिपूर्ति की वसूली विपणन संघ से की जाए, उपार्जन केन्द्रों में रखे हुए धान को चूहे दीमक एवं वर्षा से नुकसान पहुंच रहा है। इससे बारदाने भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। ऐसे में क्षतिग्रस्त बारदानों की राशि की कटौती समितियों से ना की जाए, खराब बारदाने की वापसी संबंधित विभाग से कराई जाए। उन्होंने शीघ्र ही धान उठाव करने की मांग की है अन्यथा आंदोलन अनिश्चितकाल तक चलेगा। जिला में 10 लाख क्विंटल धान का उठाव होना बाकी है। उपार्जन केन्द्रों में धान की रखवाली करना पड़ रहा है। धान के सूखने से मात्रा कम होने की संभावना है। इसके लिए विपणन विभाग को जिम्मेदार माना जाना चाहिए। शीघ्र ही धान के उठाव के लिए पहल की जानी चाहिए। एकलव्य चन्द्रा-जिलाध्यक्ष , सहकारी समिति कर्मचारी संघ सक्ती


























