नए विधेयकों पर चर्चा के लिए कम समय में बैठक बुलाने का विरोध, कांग्रेस और टीएमसीने तारीखों पर उठाए सवाल

नईदिल्ली, २१ अगस्त । भारतीय न्याय संहिता विधेयक, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक और भारतीय साक्ष्य विधेयक पर चर्चा को तैयार गृह मामलों से संबंधित संसद की स्थाई समिति के कुछ सदस्यों ने कम समय में बैठकों में भाग लेने के लिए कहे जाने को लेकर विरोध जताया है। सूत्रों ने बताया कि कम-से-कम तीन सदस्यों तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन, काकोली घोष दस्तीदार और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने समिति के अध्यक्ष बृजलाल को पत्र लिखकर 24, 25 और 26 अगस्त को प्रस्तावित इन बैठकों के समय पर सवाल उठाया है। उन्होंने तारीखों में संशोधन की मांग की है। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में ब्रिटिशकालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 1860, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) 1898 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की जगह लेने के लिए तीन नए विधेयक-भारतीय न्याय संहिता, 2023 विधेयक, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 विधेयक और भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 पेश किए थे। इन तीनों विधेयकों पर गृह मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थाई समिति चर्चा करने वाली है। कार्यक्रम के अनुसार, समिति को जेल स्थिति बुनियादी ढांचा और सुधार पर एक मसौदा रिपोर्ट अपनाने के लिए 24 अगस्त को बैठक करनी है। इससे पहले जेल सुधार मुद्दे पर चर्चा के लिए हुई बैठक के दौरान विपक्षी सदस्यों ने मणिपुर मुद्दे पर चर्चा करने में समिति की विफलता का हवाला देते हुए विरोधस्वरूप बहिर्गमन किया था। सदस्यों को 18 अगस्त की रात को एक नया नोटिस जारी किया गया था, जिसमें कहा गया है कि 24, 25 और 26 अगस्त को गृह सचिव अजय कुमार भल्ला तीनों विधेयकों के विभिन्न पहलुओं पर सदस्यों को जानकारी देंगे। ओब्रायन ने अपने पत्र में कहा कि संसद का मानसून सत्र बीत जाने के बाद संसद सदस्यों की अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों को लेकर प्रतिबद्धताएं हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा, इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के लिए यह बहुत ही अल्पकालिक नोटिस है। कृपया तिथियों को संशोधित करें और इन तिथियों को सितंबर में निर्धारित करें।

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