नर्स को नेग नहीं दिया तो मेज पर लिटाकर रखा नवजात मासूम ने तोड़ा दम, अब दोषी स्टाफ पर होगी कार्रवाई

पूर्णिया। राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के लेवल रूम में उस समय मानवता तार-तार हो गई जब महज दो हजार के लिए मेज पर ही नवजात ने दम तोड़ दिया। मामले में अब अस्पताल उपाधीक्षक ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराने की बात कही है।पीडि़त पक्ष ने आवेदन तक कार्रवाई की मांग की है।
प्रसव के बाद ड्यूटी कर रहे नर्स ने दो हजार की मांग की थी जिसको पीडि़त ने देने में असमर्थता जताई।इस दौरान टेबल पर ही नवजात 25 मिनट तक पड़ा रहा है। स्वजन में नवजात को उठाकर जब चिकित्सक के पास पहुंचे तो, तबतक उसकी मौत हो गई थी। यह ह्र्दय विदारक घटना जो भी सुना वह सन्न रह गया।स्वजन ने मामले में अधीक्षक को आवेदन सौंप कर मामले में कार्रवाई की मांग की है। स्वजन ने आरोप लगाया कि लेबर रूम में ड्यूटी कर रही नर्स पर 2000 रुपये के लिए नवजात को 25 मिनट तक मेज पर ही छोड़ दिया।स्वजन ने सौ रुपया नर्स को दे रहे थे। उस समय तक नवजात की हालत खराब हो चुकी थी। आनन – फानन में नवजात को चिकित्सक के पास स्वजन ही लेकर गए। जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद से स्वजन ने अस्पताल में हंगामा भी किया।जीएमसीएच के उपाधीक्षक ने मामले की जांच के लिए कमेटी का गठित करने की बात कही है। अररिया जिले के महलगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत बेगना निवासी प्रीतम विश्वास ने बताया कि गुरुवार दोपहर चार बजे प्रसव के लिए पत्नी को जीएमसीएच में भर्ती किया था। बच्चे को जन्म दिया तो मौके पर मौजूद नर्स ने 2000 रुपये नेग की मांग की।दो हजार रुपए उनके पास नहीं थे तो उसने 100 रुपए नर्स को दिया। नर्स ने सौ रुपया नहीं लिया। बच्चा स्वजन को सौंपने के बजाय नर्स ने कपड़े में लपेट कर मेज पर रख दिया और वहां से भाग गई।प्रीतम विश्वास के मुताबिक उसने अपने दोस्तों से कर्ज लेकर दो हजार रुपये की व्यवस्था की और नर्स को देने की कोशिश की। जब आधा घंटा के बाद खुद बच्चा को देखने का प्रयास किया तो लेकिन उसकी हालत खराब थी। जब वहां पर मौजूद बच्चे को डाक्टर से दिखाया तो बच्चा को मृत घोषित कर दिया।मौके पर पुलिस पहुंच कर मामले को शांत कराया। पीडि़त ने आवेदन देकर न्याय की मांग की है। उपाधीक्षक डॉ. भरत कुमार ने बताया कि मामले की जांच के लिए एक जांच टीम का गठन किया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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