
जांजगीर-चांपा। पंचायत विभाग में फंड ब्रेक लगने ग्राम पंचायतों से काम काज ठप्प पड़ गया यह खासकर मनरेगा, रीपा, गोधन न्याय योजना जैसे सहित जितनी भी विकास की योजनाएं संचालित है वह ठप पड़ गया है। दरअसल अब तक मंत्री मंडल का गठन नहीं हुआ था तब तक काम में रोक लगी थी। शुक्रवार को मंत्रियों के विभागों का बंटवारा हो जाने से अब आगे के काम काज की गतिविधियां आगे बढ़ पाएगी। हालाकि जानकारों का मानना है कि पूर्ववर्ती सरकार की अधिकतर योजनाएं ठंडे बस्ते में जाएंगी या उन योजनाओं का नाम बदला जाएगा। फिलहाल पंचायतों में विकास के हर फंड पर कुंडली लगी हुई है। इसके चलते पंचायतों में विकास के काम नहीं हो पा रहे हैं। आपको बता दें कि सरकार बदलते ही राजधानी से यह फरमान आया था कि सरकार की सभी योजनाओं पर जो बजट है उसे यथावत रखी जाए,किसी भी मद की राशि में छेड़छाड़ न की जाए। यह आदेश तब तक लागू रहेगा जब तक मंत्री मंडल का गठन न हो जाए। ऐसे में पंचायतों में अधिकतर योजनाओं की राशि रिलीज नहीं हो पा रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद पंचायत अध्यक्ष, सरपंच सहित पंचायत विभाग के पदाधिकारी जिला पंचायत का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें फंड से संबंधित सवालों का जवाब नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं बल्कि नए काम काज को लेकर भी किसी तरह की प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिल पाएगी यह भी संसय है। जनपद पंचायतों में जनपद विकास निधि तकरीबन 2-2 लाख रुपए दी जाती है उसे भी रोक दिया गया है। जबकि इस मद में प्रशासकीय स्वीकृति भी मिल चुकी है। काम पूरा हो चुका है। इसके बाद भी इस मद की राशि नहीं दी जा रही है। इससे सरपंचों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। जिन ग्राम पंचायत में विकास कार्यों को आधे से अधिक मूर्तरूप दे दिया गया है ग्राम पंचायतों में विकास की राशी नही मिल पा रही है। खासकर जनपद विकास निधि में भी बेन लगा हुआ है। जबकि आचार संहिता लगने के पहले प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी थी या जो काम पूरा हो चुका है उनका भुगतान तत्काल कर दिया जाना चाहिए इसके बावजूद उन्हें फंड रिलीज नहीं किया जा रहा है जिस पंचायत को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद फंड नहीं दिया जा रहा है।































