पशु ऋण स्वीकृति में गड़बड़ी, आरोपितों की जमानत खारिज

सूरजपुर। शिवप्रसादनगर सहकारी समिति में हुए पशु ऋण गड़बड़ी मामले में आरोपित सहकारी बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत समिति प्रबंधक व एक अन्य कर्मचारी की जमानत याचिका सूरजपुर न्यायालय ने खारिज कर दी गई है। शिवप्रसादनगर सहकारी समिति द्वारा अपात्र किसानों को नियम विरुद्ध तरीके से पशु संबंधी ऋण प्रदान किया गया था। इसकी शिकायत तत्कालीन सूरजपुर कलेक्टर इफ्फत आरा से की गई थी। इस पर कलेक्टर ने चार सदस्यीय जांच टीम गठित कर मामले की जांच कराकर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश बैंक के सीईओ को दिए थे लेकिन थाना प्रभारी के द्वारा दस बिंदुओं पर आपत्ति लगाकर पुन: जांच हेतु वापस जांच दल के पास भेज दिया था। जांच दल ने पुन: दस बिंदुओं पर जांच कर जमा कर दिया। इसके बाद थाना झिलमिली में बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अजित सिंह, समिति प्रबंधक साधना कुशवाहा व समिति के कर्मचारी मन्नू लाल के विरुद्ध धारा 409, 420, 34 के तहत चार सौ बीसी का अपराध दर्ज कर लिया था। मामले में रिपोर्टकर्ता सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी रामचंद्र ठाकुर ने जांच प्रतिवेदन के अनुसार झिलमिली थाने में लिखित शिकायत प्रस्तुत करते हुए बताया था कि बैंकिंग नियम उलंघन करते हुए निर्धारित ऋणमान के विपरीत दोषियों ने 71 किसानों को एक करोड़ 88 लाख 59 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत करा दिया था। इससे समिति व बैंक को आर्थिक क्षति पहुंची है। पुलिस ने तब आरोपितों को चेक लिस्ट के आधार पर जमानत दे दिया था। मगर इस मामले की डायरी जब सूरजपुर न्यायालय में पेश हुई तो तीनों आरोपितों की जमानत याचिका खारिज कर जेल भेजने का आदेश दे दिया। न्यायालय से जमानत याचिका रद्द होते ही सुनियोजित ढंग से शाखा प्रबंधक व समिति प्रबंधक को अस्पताल ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें अनफिट घोषित कर अस्पताल में दाखिल कर लिया। इससे वे जेल जाने से बच गए, लेकिन तीसरे आरोपित को पुलिस ने जेल दाखिल कर दिया था। मंगलवार को फिर एक बार जिला अदालत से जमानत याचिका खारिज कर दी गई है।

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