
श्रीनगर, २२ नवंबर । 25 वर्ष पूर्व वह पढ़ाई के लिए अलीगढ़ गई थी, लेकिन फलस्तीनी युवक से विवाह रचा गाजा पहुंच गई। गाजा की जंग में संकट में फंसी तो फिर वतन की याद आई। मोदी सरकार ने भी युद्ध के मैदान में फंसी देश की बेटी का साथ नहीं छोड़ा और उसे सुरक्षित गाजा से निकालकर मिस्त्र में भारतीय दूतावास तक लाया गया। इसके बाद वह अपनी बेटी के साथ घर लौट आई है। एक माह से अधिक समय तक दहशत में रहने के बाद श्रीनगर की लुबना नजीर अपनी माटी पर लौटकर अब बेहतर महसूस कर रही है, पर मौत को करीब से देखने का डर अब भी उसके जहन से निकल नहीं रहा है। वह बार-बार मोदी सरकार और दूतावास के अधिकारियों का आभार जता रही है। लुबना ने कुछ सप्ताह पहले केंद्र सरकार से अपील की थी कि मैं भारत की बेटी हूं और गाजा में संकट में फंसी हूं। यहां सब बंद है और जीवन नरक बन रहा है। इसके बाद सरकारी एजेंसियां सक्रिय हुईं और युद्ध के मैदान से उसे व उसकी बेटी करीमा को निकाला गया। उसका पति नादेल तोमान अब भी फलस्तीन में ही है। लुबना अब श्रीनगर पहुंच गईं हैं। मगर उसके स्वजन किसी से भी बातचीत से बच रहे हैं। उनके एक करीबी रिश्तेदार ने कहा कि खुदा का शुक्र है कि वह गाजा से सुरक्षित निकल आई। अभी वह पूरी तरह सहज नहीं हो पाई है और बात करते हुए रुआंसी हो उठती है। हमें अब उसके पति की चिंता है, वह वहीं गाजा में है। लुबना नजीर शाबू के करीबी रिश्तेदार अदनान जान ने कहा कि लुबना ने जो मुसीबत वहां देखी, उससे कहीं ज्यादा मानसिक पीड़ा उसकी बुजुर्ग मां ने यहां झेली है। हम सभी बहुत परेशान थे। घर में उसका एक भाई और बुजुर्ग मां फातिमा है। लुबना नजीर के भाई खुर्शीद व अन्य स्वजन अभी विश्वास ही नहीं कर पा रहे हैं कि उनकी बहन सुरक्षित लौट आई है। अदनान ने बताया कि लुबना की एक बेटी और बेटा काहिरा में ही पढ़ाई कर रहे हैं। लुबना पहले फलस्तीन प्रशासन की वैज्ञानिक समिति में काम करती थी। बच्चों की देखभाल के लिए उसने यह नौकरी छोड़ दी थी। बाद में उसने कुदूस विश्वविालय में अरबी-अंग्रेजी अनुवादक के रूप में नौकरी शुरू की। लालचौक स्थित लड़कियों के मिशनरी स्कूल मैलिनसन बिस्को की छात्रा रही लुबना नजीर बीते दो दशक से भी ज्यादा समय से फलस्तीन में परिवार संग रह रही थी। उसने फलस्तीनी नागरिक नादेल तोमान के साथ 1997 में प्रेम विवाह रचाया था। नादेल से उसकी मुलाकात अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुई थी, जहां वह बायोकेमिस्ट्री में परास्नातक की पढ़ाई कर रही थी। नादेल इंजीनियरिंग का छात्र था।इजरायल द्वारा हमास के ठिकानों पर हमलों के बाद वहां स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। नागरिकों ने सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायन शुरू कर दिया है। लुबना नजीर ने 10 अक्टूबर को इंटरनेट मीडिया के जरिये भारत सरकार से आग्रह किया था कि उसे व उसकी बेटी को गाजा से सुरक्षित निकाला जाए। बीते सप्ताह राफा की सीमा खुली और उसे मिस्त्र की राजधानी काहिरा लाया गया। उसने इसके लिए रामल्लाह, तेल अवीव और मिस्त्र स्थित भारतीय दूतावास का आभार जताया कि उन्होंने उसे गाजा से सुरक्षित निकलने में मदद की है। उसके साथ उसकी बड़ी बेटी करीमा भी गाजा से मिस्त्र पहुंची। हम बीते माह से ही उसकी घर वापसी के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे थे। हम प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय से संपर्क में थे। लुबना के परिजनों से मेरी बात हो गई है, उन्होंने उसके घर लौटने की पुष्टि करते हुए केंद्र सरकार का आभार जताया है।
























