प्रत्याशी जुटे प्रचार में, उलझ रहे समर्थक और कार्यकर्ता

विभिन्न क्षेत्रों में निर्मित हो रही अजीब स्थिति
कोरबा। दूसरे चरण में 17 नवंबर को कोरबा जिले में मतदाता वोट डालेंगे। 8 दिन का समय मतदान के लिए बचा है। अंतिम सप्ताह में विधानसभा के कोने-कोने तक पहुंचने की कोशिश में प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशी जुटे हुए हैं। दूसरी ओर यहां-वहां प्रचार के दौरान किसी न किसी बात को लेकर उनके कार्यकर्ता और समर्थक दूसरों से उलझते हुए नजर आ रहे हैं। इस प्रकार के हालात खासतौर पर कोरबा शहरी विधानसभा क्षेत्र में कुछ ज्यादा ही बने हुए हैं। ऐसे में कुछ मौकों पर पुलिस को अपनी ओर से हस्तक्षेप करने के लिए आगे आना पड़ रहा है।
कोरबा विधानसभा से कांग्रेस के उम्मीदवार और राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल हैं। उनके सामने भाजपा ने कटघोरा के पूर्व विधायक और महापौर रह चुके लखनलाल देवांगन को प्रत्याशी उतारा है। कोरबा से आम आदमी पार्टी के इंजीनियर विशाल केलकर भी मैदान में हैं लेकिन मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच होने के समीकरण दिख रहे हैं। मतदान से ठीक पहले इस विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक पारा अचानक से बढ़ गया है। इसके पीछे अलग-अलग कारण और परिस्थितियां निर्धारक मानी जा रही है। प्रचार संसाधनों के साथ प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत मतदाताओं तक पहुंचने और अपनी बात रखने में झोंकी हुई है। अपने मुद्दों और पार्टी की नीतियों के बारे में लोगों को अवगत कराया जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में स्वाभाविक रूप से नेताओं का स्वागत सत्कार भी हो रहा है तो कहीं-कहीं विरोध के नजारे भी देखने को मिल रहे हैं। कोहडिय़ा वार्ड के चारपारा इलाके में पिछली शाम चुनाव प्रचार के दौरान पहुंचे कांग्रेस प्रत्याशी के सामने कुछ युवाओं ने नारेबाजी की। यहां रास्ता भी रोका गया जिसके बाद दूसरा पक्ष सक्रिय हुआ और फिर पुलिस ने अपनी ओर से दखल करते हुए स्थिति सामान्य की। खबर के मुताबिक अगली कड़ी में इसी इलाके में एक स्थान पर कांग्रेस प्रत्याशी की सभा के दौरान चारपारा क्षेत्र के लोगों ने नारेबाजी की। इसे लेकर कहा जा रहा है कि इलाके में काफी नाराजगी है। याद रहे यह क्षेत्र भाजपा प्रत्याशी का है।
इस घटनाक्रम के अगले दिवस एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल हुआ जिसमें भाजपा प्रत्याशी लखनलाल देवांगन से विकास के मुद्दों पर एक युवक बहस करता नजर आ रहा है। प्रत्याशी के साथ उनके कार्यकर्ता भी इस वीडियो में नजर आ रहे हैं जो मामले को कंट्रोल करने की जद्दोजहद में देखे गए। संबंधित युवक ने भाजपा प्रत्याशी से पूछा कि उन्होंने बीते वर्षों में क्षेत्र के लिए क्या किया और अचानक इस चुनाव में वोट मांगने के लिए पहुंच गए। इसके जवाब में लखनलाल ने कोरबा से महापौर रहते हुए अपने द्वारा किये गए विभिन्न कार्यों को गिनाया और युवक को संतुष्ट करने की कोशिश की। इस पर अगला सवाल होता है कि बीते 5 वर्ष में सडक़, पानी, चिकित्सा और शिक्षा के लिए विभिन्न कार्य कांग्रेस सरकार और स्थानीय विधायक के द्वारा कराए गए हैं। इसके साथ ही मौके पर किचकिच शुरू हो जाती है और फिर हंगामे की स्थिति में युवक और प्रचार करने आए लोग यहां से अपने-अपने रास्ते पर बढ़ लेते हैं।
खबर के अनुसार दो दिन पहले इसी प्रकार का एक वाक्या घंटाघर क्षेत्र में भी सामने आया। यहां पर सीपीआई उम्मीदवार और उनके समर्थक झंडे, बैनर के साथ प्रचार में जुटे हुए थे। उस दौरान कुछ लोगों ने साफ तौर पर कहा कि नक्सल जैसी समस्या को लेकर जो पार्टी अपनी विचारधारा को अब तक स्पष्ट नहीं कर सकी उसे कम से कम इस इलाके से महत्व बिल्कुल नहीं मिलना है। जानकार बताते हैं कि चुनाव प्रचार के अंतिम दिवस यानि 15 नवंबर की शाम तक इस तरह के नजारे न केवल कोरबा बल्कि जिले की कटघोरा, रामपुर और पाली तानाखार सीट पर देखने को जरूर मिलेंगे।
खीझ उतारने का भरपूर मौका
चुनाव को भले ही प्रत्याशी चुनौती के रूप में ले रहे हैं और इसी हिसाब से शारीरिक और मानसिक तैयारी के साथ भारी भरकम संसाधन झोंकने में लगे हुए हैं ताकि आगे की व्यवस्था हो सके। इन सबसे अलग आम लोगों के लिए चुनाव का मतलब होता है- अलग-अलग कारणों से अपनी खीझ उतारने का अवसर। उनके अपने मुद्दे हैं और समस्याएं। अनेक स्थानों पर पूरे तर्क और आधार के साथ लोग चुनाव प्रचार में प्रत्याशियों के साथ-साथ उनके लिए काम करने वाले नेताओं की भरपूर क्लास लगाने से पीछे नहीं हैं।
रिश्ते खराब नहीं करने पर भी ध्यान
इन सबसे अलग हटकर जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों में समझदार समर्थक और कार्यकर्ता अपनी नीति के अनुसार नेताओं के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं। ऐसे लोगों को मालूम है कि चुनाव के बाद बहुत कुछ बदल जाता है और फिर उन्हें अलग-अलग स्तर पर काम भी निकालना होता है। इसलिए कोशिश यह की जा रही है कि प्रचार के दौरान किसी भी कारण से ऐसा कुछ न हो जिससे लंबे समय के लिए मनमुटाव हो और रिश्ते खराब हो।

RO No. 13467/11