
नईदिल्ली, १३ अक्टूबर । रियल टाइम सोर्स अपॉर्शन्मेंट अध्ययन के लिए राउज एवेन्यू में चल रही सुपरसाइट प्रदूषण से जंग में खुद ही हांफने लगी है। पिछले तीन चार दिन से इसकी वेबसाइट आर आसमान डॉट काम बंद पड़ी है। न प्रदूषण के आंकड़े मिल पा रहे हैं और न ही किसी अधिकारी से इसकी वजह पता चल पा रही है।रियल टाइम आधार पर प्रदूषण के स्रोतों की पहचान के लिए राउज एवेन्यू के सर्वोदय बाल विद्यालय में सीएम अरविंद केजरीवाल ने इस सुपरसाइट और मोबाइल एयर क्वालिटी मानिटरिंग स्टेशन की शुरुआत 30 जनवरी को की थी। दावा था कि रियल टाइम सोर्स अपॉर्शन्मेंट स्टडी से हर घंटे पता चलेगा कि कहां और किस वजह से प्रदूषण है। साथ ही अगले तीन दिन का पूर्वानुमान मिल सकेगा।वाहन, उद्योग और बायोमास बर्निंग की वजह से किसी क्षेत्र में होने वाले प्रदूषण का पता चलेगा और उससे लडऩे में भी मदद मिलेगी। मोबाइल बैन की मदद से हाट स्पाट एरिया में प्रदूषण के कारणों का पता लगाकर उसे कम करने की कोशिश होगी। हाट स्पाट क्षेत्र में प्रदूषण क्यों ज्यादा है, यह पता चलता रहेगा और फिर उसी स्रोत पर ध्यान देते हुए प्रदूषण कम करने की कोशिश होगी। मोबाइल वैन दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में भेजी जाएगी, जिससे हर कोने में प्रदूषण स्रोतों के बारे में पता चल पाएगा। यह एडवांस मशीन लर्निंग माडल के आधार पर अगले तीन दिनों के लिए पीएम -2.5 स्तरों का पूर्वानुमान बताएगी।इसके अलावा यहां डैशबोर्ड और पोर्टल भी रहेगा। यह सारा कार्य डीपीसीसी की देखरेख में किया जा रहा है। समस्या यह है कि मोबाइल वैन के आंकड़ों का पता ही नहीं चल पा रहा तो अब डैशबोर्ड भी बंद पड़ा है। पिछले तीन दिन से पता ही नहीं चल पा रहा कि दिल्ली के प्रदूषण में किस कारक की कितनी हिस्सेदारी है। इस समय जबकि दिल्ली में हवा बिगड़ रही है, डैशबोर्ड का कई दिनों तक खराब पड़े रहना चिंताजनक है।एक अहम बात यह कि डैशबोर्ड पर आकाईव भी नहीं है जिससे कुछ दिन पहले की स्थिति पता चल सके। हैरत की बात यह है कि इसकी जानकारी अधिकारियों तक को नहीं है। संपर्क करने पर भी किसी से कोई जवाब नहीं मिलता। सुपरसाइट के प्रभारी आइआइटी कानपुर के प्रो. मुकेश शर्मा फोन ही नहीं उठाते तो डीपीसीसी की वरिष्ठ विज्ञानी नंदिता मोइत्रा खुद को हर समय बैठक में बताती हैं। यहां तक कि डीपीसीसी के सदस्य सचिव डा के एस जयचंद्रन ने भी मोबाइल पर संदेश भेजने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया कि यह समस्या क्यों आ रही है और कब तक ठीक हो पाएगी।


























