
बतौली। सरगुजा जिले के लुंड्रा जनपद के ग्राम सिलसिला स्थित मां कुदरगढ़ी एलुमिना हाइड्रेट प्लांट में चार श्रमिकों की मौत प्रबंधन की लापरवाही और सुरक्षा को नजरअंदाज करने के कारण हुई है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद प्लांट के जीएम राजकुमार सिंह, सुपरवाइजर रंजीत सारथी, प्रोडक्शन मैनेजर तेज मलानी, बायलर इंचार्ज बीके मिश्रा, राकेश कुमार ,ठेकेदार विपिन मिश्रा व अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1)तथा 3(5)के तहत अपराध पंजीकृत किया है।
हादसे में घायल दो कर्मचारी अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी हादसे की जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कलेक्टर विलास भोसकर ने पांच सदस्यीय जांच दल का गठन किया है इसमें औद्योगिक सुरक्षा अधिकारी भी शामिल हैं। जांच दल की रिपोर्ट से पहले पुलिस ने प्रारंभिक जांच में ही प्लांट के तकनीकी अधिकारियों व कर्मचारियों को हादसे का जिम्मेदार मानते हुए अपराध पंजीकृत किया है। बता दें, प्लांट हादसे में मध्य प्रदेश तथा बिहार के चार श्रमिकों की मौत हुई है। मध्यप्रदेश के प्रिंस सिंह व मनोज सिंह तथा बिहार के गया जिले के करणवीर माझी व रमेश्वर माझी मौत के बाद प्रबंधन द्वारा 15 -15 हजार रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता राशि देकर सोमवार को ही उनके शवों को एंबुलेंस से गृहग्राम के लिए रवाना कर दिया गया था। रघुनाथपुर पुलिस चौकी प्रभारी राजेंद्र सिंह द्वारा दर्ज एफआइआर के अनुसार मां कुदरगढ़ी एलुमिना हाइड्रेट प्लांट के मालिकों ने जीएम राजकुमार सिंह,सुपरवाइजर रंजीत सारथी,प्रोडक्शन मैनेजर तेज मलानी, बायलर इंचार्ज बीके मिश्रा, राकेश कुमार की देखरेख में लुधियाना के तेजबहादुर नगर मण्डियनकला निवासी विपिन मिश्रा को कार्य करने का ठेका दिया था। इसके लिए बकायदा ठेकेदार से अनुबंध किया गया था। आरोप है कि अनुबंध में चल रहे कार्य के दौरान उत्पादन लक्ष्य बढाने के लिए सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज किया गया।प्लांट में बाक्साइट को गलाकर एल्युमिनियम का चूर्ण बनाया जाता था।
पुलिस की जांच में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि पहले प्लांट में भूसे का उपयोग किया जाता था।घटना दिवस आठ सितंबर को सुबह की पाली में भूसे के स्थान पर क्षमता से अधिक कोयले का चूरा भर दिया गया था इस कारण हापर टूट कर गिर गया और चार श्रमिकों की मौत हो गई। दो श्रमिक अभी भी अस्पताल में भर्ती है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (1) में उल्लेख है कि कोई भी व्यक्ति जो लापरवाही या लापरवाही से किसी अन्य व्यक्ति की मौत का कारण बनता है, जो गैर इरादतन हत्या के बराबर नहीं है, उसे पांच साल तक की कैद और जुर्माने से दंडित किया जाएगा। धारा 3 (5) का मतलब है कि एक समूह में किए गए अपराध के लिए हर सदस्य को समान रूप से दोषी माना जाएगा चाहे उसने सीधे तौर पर अपराध किया हो या नहीं। सामूहिक आपराधिक कृत्य में अगर कई लोग मिलकर एक अपराध को अंजाम देते हैं, तो सभी लोगों को उस अपराध के लिए दोषी माना जाएगा।























