
कोरबा। भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य विकास महतो ने अपने जगदलपुर प्रवास के दौरान दंतेवाड़ा के बस्तर में स्थित 14वीं शताब्दि के पौराणिक एवं सिद्ध शक्तिपीठ मां दंतेश्वरी की विधि विधान से पूजा अर्चना कर जिले तथा प्रदेश वासियों के लिए सुख, समृधि एवं खुशहाली की कामना की।
दंतेश्वरी मंदिर दंतेवाड़ा के बस्तर में स्थित है। यहां का अनुपम सौंदर्य भक्तों के मन को धार्मिक भाव से भर देता है. देवी के दर्शन हेतु दूर-दूर से लोग यहां पहुँचते हैं। मान्यता है कि देवी के दांत के गिरने पर यहां का नाम दंतेवाड़ा पड़ा तथा देवी को दंतेश्वरी देवी कहा जाता है। हरे भरे वनों एवं पहाडिय़ों से परिपूर्ण इस स्थान में माँ सती के दाँत गिरने की पौराणिक कथा का महत्व दृष्टिगोचर होता है इसके अनुसार माना जाता है की जब एक बार देवी सती के पिता दक्ष ने अपने प्रजापति होने पर एक महायज्ञ का आयोजन किया जिसमें उन्होंने सभी देवों को निमंत्रण दिया किंतु केवल अपनी पुत्री सती व उनके पति भगवान शिव को नहीं बुलाया। क्योंकि उनके मन में शिव के प्रति ईर्ष्या व्याप्त थी। सती को जब इस बात का भान हुआ कि उसके पिता ने यज्ञ का आयोजन किया है तो उनके मन में भी यज्ञ में शामिल होने की इच्छा जागृत हुई और उन्होंने भगवान शिव से जाने की आज्ञा मांगी पहले तो प्रभू ने देवी को समझाया कि बिना बुलाए जाना उचित नहीं है परंतु देवी के आग्रह करने पर शिव ने उन्हें जाने की आज्ञा प्रदान की पिता के घर जाकर उन्हे पिता के कटु वाणी से बहुत आहत हुई परंतु जब उन्होने देखा की यज्ञमंडप में सभी देवताओं के भाग हैं लेकिन भगवान शिव का भाग नहीं है इस पर उन्होंने पिता दक्ष से पूछा तो दक्ष ने भगवान शिव का अपमान करना शुरू कर दिया अपने पति के बारे में अपमान जनक शब्दों को सुन वह बहुत आहत हुई ओर वहीं उस यज्ञ की अग्नि में कूद पड़ी। चारों ओर हाहाकार मच गया, भगवान शिव को इस बात का पता चला तो उन्होंने दक्ष का अंत कर दिया और यज्ञ को नष्ट कर दिया परंतु बाद में दक्ष को जीवन दान दिया। सती के शव को उठाए भगवान शिव ब्रह्माण्ड में विचरने लगे जिस कारण सती के अंग पृथ्वी में चारों ओर गिरे और जहां भी उनके अंग गिरे वह स्थान शक्ति पीठ कहलाए इसी प्रकार दंतेश्वर में माँ का दांत गिरा जिस कारण यह स्थान शक्ति पीठ कहलाया।




















