
कॉल डिपो एवं वासरी संयंत्रों से लोगों की सेहत पर पढ़ रहा है असर
सीताराम नायक
जांजगीर-चांपा। जिले में जगह-जगह कोल डिपो खोलने का अनुमति देना जिला प्रशासन के अधिकारियों के लिए कमाई का प्रमुख जरिया बन गया है जो बिना सोचे विचारे किसी भी जगह के लिए कोल डिपो का अनुमति प्रदान कर दे रहे हैं जिसके बदले में अधिकारी वर्ग मोटी रकम लेकर मालामाल हो रहे हैं। जिसका खमियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है और लोग प्रदूषण के मार शिकार हो रहे हैं। इलाके में कोल डिपो व रेक प्वाइंट का अनुमति जिला प्रशासन द्वारा दी जा रही है। वहीं रसूखदार धनबल पर शासन के कानून को दरकिनार कर कोल डिपी का संचालन कर रहे हैं। जिसका खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कोयले के काले डस्ट को लेकर न सिर्फ शहरवासियों का जीना हो गया है बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर देखने को मिल रहा है बल्कि खेतों की पैदावारी में भी का असर पढऩे लगा है। प्रशासन से शिकायत भी की जाती है, लेकिन शिकायकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही है। इसके चलते लोग काले डस्ट व धूल की हवा लोग खाने मजबूर है।
यहां यह बताना आवश्यक है कि जांजगीर नैला में रेलवे सेटिंग के पास कॉल डिपो खोल दिया गया है इसके अलावा महावीर कोल वाशरी बड़ा उपक्रम स्थापित किया गया है । इसी तरह बलौदा ब्लाक के अनेक स्थान पर कोल मफिया कॉल डिपो संचालित करने लगे हैं विशेष कर कोसमंदा, उच्च भीठ्ठ, कुरदा शहित अनेक स्थानों पर कोल डिपो का निर्माण शहर एवम गांव के बीच किया जा रहा है। इससे ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण सहित अन्य समस्याएं उत्पन्न हो रही है।
कोल साइडिंग के लिए केंद्रीय पर्यावरण विभाग से अनुमति नहीं है। मौके पर पानी का छिडक़ाव, पक्की नाली का निर्माण सहित अन्य सुविधा होनी चाहिए। रेक प्वाइंटों में अतिरिक्त कोयले का वजन रहता है, इस अतिरिक्त कोयले को निकालकर अन्यत्र खपाया जाता है। रेक पॉइंट में राखड़ की अनवरत मिलावट की जा रही है जो अच्छे कोयले को बेचकर इसके बदले में उद्योगों के काले राखड़ को मिलावट करके अन्यत्र भेजा जाता है।
कोयले के इस कारोबार में अनेक लोग जिनके पास कल तक खाने के लिए दाने नहीं थे वे मालामाल हो गए हैं। रैक प्वाइंट से कोयले की चोरी आम बात है।
जांजगीर नैला कोल साइंडिंग के बगल में रिहायशी इलाका है जहां के लोगों को कोयले के काले डस्ट से परेशानियों का करना पड़ रहा है लोगों का छत कोयले की डस्ट से पडऩे लगा है वही लोगों को कपड़ा सुखाने में भी परेशानी हो रही है इतना ही नहीं बल्कि आसपास संचालित कोल वाशरी एवं कोल रेट पॉइंट तथा कोल डिपो के कारण यहां का वातावरण लगातार प्रदूषित होने लगा है जिससे सांस की बीमारी के मरीज बढऩे लगे हैं।
वहीं शहर के छोटे-छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर भी इसका बड़ा असर पड़ता हैं।
जांजगीर-चांपा के विधायक ब्यास कश्यप ने बताया कि नैला के रैक प्वाइंट को हटाने के लिए कई बार रेलवे प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है। फिर भी इस पर कार्रवाई नहीं हो रही है। अब इसके लिए लगातार अभियान छेड़ा जाएगा। इसी तरह जिला खनिज अधिकारी हेमंत चेरपा इन कोल माफिया के सामने नतमस्तक है जो नियमों को रोदते हुए कार्य कर रहे हैं किंतु खनिज अधिकारी हाथ में हाथ धरे बैठे हुए हैं।
जबकि कोल साइडिंग के पास निस्तारी का तालाब है जहां कोयले का काला डस्ट तालाब के पानी में समा जाता है। इसके चलते इस तालाब में निस्तारी कठिन हो गया है। परंतु यह सब अधिकारियों की आंखों में नही दिखती जिसके लिए जनता में आक्रोश बढऩे लगा है और वह तीव्र आंदोलन की तैयारी करने लगी है।














