सऊदी-इजरायल का रिश्ता जोड़ने की मुहिम पर जमी बर्फ, ठंडे बस्ते में जा गिरी अमेरिका नीति

रियाद, [एजेंसी]। सऊदी अरब और इजरायल के संबंध सामान्य करवाने की अमेरिकी योजना पर बर्फ पड़ गई है, उसके अब ठंडे बस्ते में जाने के संकेत हैं। इजरायल पर हमास के हमले और उसके बाद इजरायल की जबरदस्त जवाबी कार्रवाई से यह स्थिति बनी है। ताजा परिस्थितियों में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) ने हमास के हमले की निंदा करने के अमेरिकी अनुरोध को ठुकरा दिया है और अमेरिका-इजरायल के कट्टर विरोधी ईरान के राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी से फोन पर बात की है। दोनों नेताओं के बीच टेलीफोन पर यह पहली वार्ता है। माना जा रहा है कि इजरायली कार्रवाई से अरब जगत के लोगों में जो गुस्सा पैदा हो रहा है उससे पूरे क्षेत्र में हिंसा फैलने का खतरा पैदा हो गया है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस की ईरानी राष्ट्रपति से वार्ता में यह भी बड़ा मुद्दा था। इजरायल-फलस्तीनी विवाद जिस तरह से गरमाया है उससे सऊदी अरब की इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने और अमेरिका के साथ सुरक्षा समझौता करने की योजना पटरी से उतर गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि फलस्तीनियों के हक में कोई बड़ा फैसला होने तक सऊदी अरब के लिए अमेरिका समर्थित योजना पर बढ़ पाना अब संभव नहीं होगा।
क्योंकि खतरा अरबों सहित ज्यादातर मुस्लिम देशों के नाराज होने का है। मुस्लिमों का सिरमौर सऊदी अरब यह खतरा उठाने के लिए हर्गिज तैयार नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि हमास के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के सख्त रुख के चलते अब सऊदी अरब के लिए फलस्तीनी आंदोलन को महत्व देने की मजबूरी भी खड़ी हो गई है। स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र के लिए बीते 70 वर्षों से चल रहा आंदोलन अरब देशों का समर्थन घटने से हाल के वर्षों में कमजोर पड़ गया था। माना जा रहा है कि सऊदी अरब और इजरायल के संबंध सामान्य होने पर फलस्तीनियों का अपने देश का सपना हमेशा के लिए खत्म हो जाता, इसलिए इस समझौते को रोकने के लिए ही हमास ने सात अक्टूबर के हमले को अंजाम दिया। उल्लेखनीय है सऊदी अरब ने अभी तक इजरायल को राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी है।

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