
चरचा कालरी। सरस्वती शिशु मंदिर चरचा कालरी में मनमानी व हेरा फेरी के निरंतर नए-नए कारनामे सामने आ रहे हैं गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व सरस्वती शिशु मंदिर चर्चा के वर्तमान कोषाध्यक्ष के द्वारा चर्चा थाने में 28 लाख रुपए की हेरा फेरी की शिकायत कर पुलिस थाने में प्रकरण पंजीबद्ध दर्ज कराया गया था जबकि हेरा फेरी का यह मामला उससे भी कई गुना ज्यादा है थाने में मामला दर्ज करने के बाद अभी तक विद्यालय प्रबंधन के द्वारा 28 लाख रूपों की हेरा फेरी की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई जॉकी जो की बेहद सोचनीय व दुर्भाग्यपूर्ण है विद्यालय से संबंधित अब एक और हेरा फेरी की चर्चा काफी जोरों पर है सूत्रों के अनुसार विद्यालय द्वारा वर्ष 2015-16 में 18 लाख रुपए की लागत से विद्यालय के लिए बस खरीदी की गई थी जिससे आसपास के छात्र-छात्राओं को विद्यालय लाया जा सके और स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ जाए बस खरीदने के बाद निरंतर संचालन चला काफी संख्या में बच्चे बस के माध्यम से आते थे व नियमित रूप से बस का शुल्क भी विद्यालय को देते थे कोरोना संक्रमण काल के दौरान वर्ष 2019 में स्कूल बस खड़ी कर दी गई जो 2024 तक खड़ी रही इसके पश्चात 2024 में बिना निविदा बुलाए मनमाने तरीके से बस को 640000 में बेच दिया गया स्कूल बस के संचालन के दौरान विद्यालय के बाबू और प्राचार्य मिलकर मनमाने तरीके से बिल मेंटेन करते थे रिपेयरिंग के नाम पर काफी लंबी राशि की हेरा फेरी की गई इसी क्रम में डीजल खरीदने में भी काफी ज्यादा की रकम दर्शित की गई विद्यालय की बस संचालन से प्राप्त होने वाली प्रति माह की राशि, मरम्म,त डीजल खरीदी आदि किसी भी चीज काबिल या जानकारी विद्यालय के ऑडिट रिपोर्ट में नहीं है और नहीं किसी भी डायरी अथवा रजिस्टर में उल्लेख किया गया है विद्यालय के द्वारा बस से संबंधित कोई भी रिकॉर्ड नहीं है विद्यालय में रिकॉर्ड ना होना अपने आप में सवालिया प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है इसके अतिरिक्त यह भी स्पष्ट होता है कि जानबूझकर रिकॉर्ड मेंटेन नहीं किया गया इस संदर्भ में विस्तृत जांच कार्यवाही से सच्चाई सामने आएगी
वर्तमान विद्यालय प्रबंधन को आईविद्यालय के समस्त आचार्य व प्राचार्य की शैक्षणिक योग्यता की भी जांच करनी चाहिए सूत्र के अनुसार विद्यालय में कुछ ऐसे शिक्षक भी हैं जिनकी जन्मतिथि से संबंधित कक्षा पहली से लेकर दसवीं तक की अंक सूची जिसमें वास्तविक जन्मतिथि रहती है विद्यालय में जमा नहीं की गई है इन अंकसूचियो में वास्तविक जन्म तिथि है जबकि दसवीं के पश्चात आगे की पढ़ाई से संबंधित दस्तावेज जो जमा किए गए हैं उसमें जन्मतिथि अलग है इस प्रकार यह भी अपने तरह का एक फर्जी वालाडा है।
विद्यालय प्रबंधन द्वारा पूर्व की अंकसूचियों की जांच न करना अपने आप में बेहद संदेह प्रद है साथ ही उनके कार्यशैली पर सवालिया प्रश्न चिन्ह है ऐसा प्रतीत होता है कि वर्तमान विद्यालय प्रबंधन जानबूझकर आंखें बंद किए हुए हैं और ऐसे तत्वों को संरक्षण प्रदान कर रहा है विद्यालय प्रबंधन की कार्यशाली से निश्चित ही विद्यालय की छवि धूमिल हो रही है और भविष्य भी अंधकार मय प्रतीत हो रहा है विद्यालय प्रबंधन को पूरी पारदर्शिता से कार्य करते हुए विद्यालय के विकास के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।






























