
जांजगीर-चांपा । पालिसी धारक की मृत्यु होने पर बीमा के पैसे देने से इंकार करने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि मृतक के वारिस को 50 लाख रूपए व मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 30 हजार तथा 5 हजार रूपए वाद व्यय के रूप में आदेश के 45 दिन के भीतर प्रदान करे अन्यथा आदेश की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। मुक्ता राजा बाराद्वार निवासी 1 छोटेलाल ने टाटा एआईए में संपूर्ण रक्षक बीमा पालिसी 28 जून 2022 से 28 जून 2062 तक के लिए ली थी। पॉलिसी के चालू रहने के दौरान ही ह छोटेलाल की मृत्यु हो गई थी, लेकिन विरुद्ध पक्ष टाटा एआईए बीमा कंपनी ने बीमा के पैसे देने से इंकार कर दिया। बीमा कंपनी ने कहा कि उसके पति ने बीमा दावा के प्रपोजल फार्म में अपनी बीमारी तथा आय के संबंध में गलत जानकारी दी थी, इसलिए उपभोक्ता , शिकायतकर्ता को बीमा का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे में मृतक की पत्नी जानकी बाई ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई कर उपभोक्ता आयोग जांजगीर के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू, सदस्य विशाल तिवारी ने आदेश जारी किया कि छोटेलाल ने कोई असत्य या गलत जानकारी बीमा कंपनी को नहीं दी थी। बीमा कंपनी ने बीमा पॉलिसी जारी करने के पूर्व जांच भी कराया था। उसके बाद ही पॉलिसी जारी की गई थी। उपभोक्ता को बीमा का लाभ न देकर टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने सेवा में कमी की है। अत: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के अंतर्गत पेश परिवाद को स्वीकार कर यह आदेश दिया गया कि बीमा कंपनी मृतक की वारिस जानकी बाई को 50 लाख रूपए व मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 30 हजार तथा 5 हजार रूपए वाद व्यय के रूप में आदेश के 45 दिन के भीतर प्रदान करे अन्यथा आदेश की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।















