
बीते वर्ष 19 फीसदी राजस्व से जिला पीछे
कोरबा। सवाल यह है कि क्या वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश सरकार से प्राप्त खनिज राजस्व लक्ष्य की पूर्ति करने में कोरबा जिला सफल हो सकेगा। यह इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि बीते वर्ष केवल 81 फीसदी लक्ष्य की पूर्ति ही हो सकी। हालांकि इसके लिए जो कारण जिम्मेदार रहे, इसके लिए इस बारे में सरकार को अवगत करा दिया गया है।
मौजूदा वित्त वर्ष के लिए सरकार ने कोरबा जिले को 3 हजार करोड़ खनिज राजस्व लक्ष्य अर्जित करने को कहा है। प्रदेश में सर्वाधिक लक्ष्य कोरबा से ही मिलता रहा है। इसलिए नई संभावनाओं पर काम होने के साथ लक्ष्य की मात्रा में बढ़ोत्तरी भी हो रही है। कोरबा जिले में खनिज राजस्व का पूरा दारोमदार कोयला खदानों पर टिका हुआ है। जिले में कोरबा, कुसमुण्डा, गेवरा और दीपका विस्तार क्षेत्र के अंतर्गत लगभग 20 खदानें संचालित हो रही है। इनमें से गेवरा विश्व की सबसे बड़ी खदान का दर्जा प्राप्त कर चुका है और कई रिकार्ड उसके नाम हो चुके है। जबकि एसईसीएल की ही कुसमुण्डा और दीपका विस्तार खदान को एसईसीएल ने मेगा माईंस की श्रेणी में रखा है। अकेले कोरबा जिले से ही लगभग 150 लाख टन कोयला 1 वर्ष में उत्पादित हो रहा है और यह एसईसीएल के सकल उत्पादन लक्ष्य की 60 प्रतिशत मात्रा को पूरा कर रहा है। समय के साथ देश में कोयला की बढ़ती जरूरत को पूरा करने की चुनौती कोल इंडिया की कंपनियों पर है। इनमें भी सबसे ज्यादा दबाव एसईसीएल पर है कि वह देश के लिए अधिकतम कोयला उत्पादन करते हुए उपलब्ध कराये। खबर के मुताबिक कोरबा जिले में कुछ कोयला खदानों को पुनर्जीवित करने और कुछ खदानों के विस्तार की योजना है। राज्य सरकार के स्तर पर पर्यावरणीय जनसुनवाई की प्रक्रिया पिछले वर्ष पूरी हुई है और इसकी फाईले अगली कार्यवाही के लिए वन पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार को भेजी गई है। बताया गया कि ऊपर से स्वीकृति नहीं मिलने के कारण एसईसीएल के द्वारा समय पर माईनिंग से संबंधित कामकाज इन परियोजनाओं के सिलसिले में नहीं किया जा सका। ऐसे में सरकार के खनिज विभाग को रॉयल्टी की बड़ी मात्रा से वंचित हो जाना पड़ा।
जानकार बताते है कि कोरबा जिले में खनिज राजस्व की 100 प्रतिशत लक्ष्य पूॢत नहीं होने के पीछे यही सबसे बड़ा कारण रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में कोरबा जिले ने 22 सौ करोड़ केे आसपास राजस्व अर्जित कर सका। जबकि उसे 27 सौ करोड़ रूपये अर्जित करने थे। विभाग के अधिकारियों का साफतौर पर कहना है कि इस वर्ष के लिए जो लक्ष्य प्राप्त हुआ है, उसकी कसौटी पर खरा उतरने के लिए हम प्रस्तावित पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रतिक्षा कर रहे है। अगर ऐसा होता है तो यह एक तरह से सकारात्मक स्थिति होगी और इससे कई पहलुओं पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

























