
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में ‘अमेरिका ग्रेट अगेन’ के स्लोगन के तहत ‘जीरो इमिग्रेशन’ पॉलिसी लागू की। यह पॉलिसी अब अमेरिका के लिए बोझ बनती जा रही है। अमेरिका में साल 2024 में विदेश में जन्मी आबादी 14.8 फीसदी थी, यह संख्या 1890 के बाद सबसे अधिक थी। ट्रंप के सत्ता संभालते ही प्रशासन ने बॉर्डर सीलकर दिए। शरणार्थियों के प्रवेश पर रोक लगा दी। नए आने वालों तथा लंबे समय से रह रहे लोगों को बाहर जाने के लिए मजबूर कर रहा है।
मौजूदा वक्त में अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) के एजेंट शहरों से लेकर गांवों तक में आक्रामक तलाशी अभियान चला रहे हैं, जिससे कमाने-खाने अमेरिका गए विदेशी लोग दहशत में हैं। इसी का परिणाम है कि सालाना शुद्ध आव्रजन (Net Immigration) 20 से 30 लाख घटकर महज 4.5 लाख रह गया।
अमेरिका में पड़ने लगा कामगारों का टोटा
बाइडन प्रशासन के तहत दी गई अस्थायी कानूनी राहत को रद करने से लाखों लोगों के सामने किसी भी समय निष्कासन का खतरा मंडरा रहा है। ट्रंप प्रशासन अब तक छह लाख लागों को देश से बाहर निकाल चुका है। इसका सीधा असर जमीन पर नजर आ रहा है। अस्पतालों में डॉक्टर और नर्स नहीं मिल रहे हैं। वीजा शुल्क बढ़ने के चलते स्कूलों /कॉलेज/यूनिवर्सिटी में छात्र की संख्या घट रही है। काम करने वाले लोग न मिलने के चलते रेस्तरां बंद हो रहे हैं और खेतों में फसलें खतरे में हैं।

























